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Holi 2018: बरसाना की लट्ठमार होली होती है खास, 24 फरवरी से ही बिखरने लगेगा रंग

Fri, 23 Feb 2018 09:15 AM IST
धर्म डेस्क,अमर उजाला
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बरसाना का लट्ठमार होली न सिर्फ देश में मशहूर है बल्कि पूरी दुनिया में भी काफी प्रसिद्ध है। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को बरसाने में लट्ठमार होली मनाई जाती है। नवमी के दिन यहां का नजारा देखने लायक होता है। यहां लोग रंगों,फूलों के अलावा डंडों से होली खेलने की परंपरा निभाते है। इसे देखने के लिए कई जगहों से लोग आते है।
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बरसाना राधा का जन्म स्थान है। इस दिन नंदगांव के लोग होली खेलने के लिए बरसाना गांव जाते हैं। जहां पर लड़कियों और महिलाओं के संग लट्ठमार मार खोली जाती है। फिर फाल्गुन शुक्ल की दशमी तिथि पर रंगों की होली खेली होती है।
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दरअसल यह परंपरा भगवान कृष्ण के समय से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण अपने साथियों के साथ मिलकर नंद गांव से बरसाना राधा और उनकी सखियों के संग होली खेलने पहुंचते हैं। जहां पर कृष्ण जी राधा संग ठिठोली करते है जिसके बाद वहां  की सारी गोपियां उन पर डंडे बरसाती थी।

 
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इनकी मार से बचने के लिए नंदगांव के ग्वाले लाठी और ढ़ालों का सहारा लेते हैं यहीं परंपरा धीरे-धीरे चली आ रही है जिसका आजतक पालन किया जा रहा है। इस दौरान पुरुषों को हुरियारे और महिलाओं को हुरियारन कहा जाता है। इसके बाद सभी मिलकर रंगों से होली का उत्सव मनाते है। 
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