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Baisakhi 2021: इस कारण मनाते हैं बैसाखी, जानें पर्व की परंपराएं और महत्व

Tue, 13 Apr 2021 07:28 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बैसाखी 2021 - फोटो : अमर उजाला
Baisakhi 2021: बैसाखी 14 अप्रैल को मनायी जाएगी। सुख-समृद्धि के इस पर्व  से धार्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं। पंजाब, हरियाणा में बैसाखी को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसमें गिद्दा और भांगड़ा लोक नृत्य की झलक देखने को मिलती है। यह सौर मास का पहला दिन होता है। इस त्योहार को रबी की फसल से जोड़कर देखा जाता है। आइए जानते हैं बैसाखी का त्योहार क्यों और कैसे मनाया जाता है।  
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बैसाखी 2021 - फोटो : अमर उजाला
क्यों मनाया जाता है बैसाखी पर्व?
वैशाख माह में रबी (अक्टूबर-नवंबर) की फसल के पक कर तैयार होने की खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है। किसान अपनी फसल की कटाई के बाद इस त्योहार को खुशी के रूप में मनाते हैं। इस दिन लोग अपने मित्रों और रिश्तेदारों को बैसाखी पर्व की बधाइयां देते हैं और उत्तर भारत में कई जगह मेले भी लगते हैं।
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बैसाखी 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
सिखों के लिए यह पर्व होता है खा़स
यह पर्व सिख समुदाय के लोगों के लिए बेहद खास होता है। दरअसल मान्यता के अनुसार, बैसाखी पर्व सिख समुदाय के लिए नए साल के आगमन का पर्व है। कहा जाता है कि बैसाखी के ही दिन साल 1699 में सिखों के अंतिम गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। खालसा पंथ की स्थापना का उद्देश्य आम लोगों की मुगलों के अत्याचारों से रक्षा करना था।

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बैसाखी 2021 - फोटो : अमर उजाला
बैसाखी पर्व का ज्योतिषीय महत्व
बैसाखी पर्व का ज्योतषीय महत्व भी है। दरअसल इस दिन मेष संक्रांति होती है। मेष संक्रांति से आशय सूर्य का मेष राशि में प्रवेश से है। मेष राशि में सूर्य का आना सौर नववर्ष की शुरुआत को दर्शाता है। इसी राशि से सूर्य राशिचक्र में अपने संचरण की शुरुआत करता है, जिसे वह एक वर्ष में पूरा करता है।
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बैसाखी 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
ऐसे मनाया जाता है बैसाखी का त्योहार
बैसाखी कृषि से जुड़ा लोक पर्व है इसलिए इस पर्व में लोक कला की झलक साफ देखने को मिलती है। पंजाब में लोग इस पर्व को ढोल-नगाड़ों की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा नृत्य करते हैं। लोग अपने रिश्तेदारों से मिलते हैं और उन्हें इस पर्व की बधाइयां देते हैं। वहीं गुरुद्वारों में भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। घर-घर में तरह-तरह के पकवान भी बनाए जाते हैं और लोगों को दावत दी जाती है। आज ही के दिन किसान अपनी फसल के लिए ईश्वर के प्रति कृतज्ञ होते हैं।
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