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April Pradosh Vrat 2026: अप्रैल का आखिरी प्रदोष व्रत कब है ? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

Tue, 21 Apr 2026 04:33 PM IST
Megha Kumari ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

April Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत रखने से जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ती हैं। मान्यता है कि, नियमित रूप से इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति होती हैं।
 
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Pradosh Vrat 2026 - फोटो : अमर उजाला
April Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत भगवान शिव की उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन संध्या काल में विशेष रूप से महादेव की उपासना की जाती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और सभी प्रकार के कष्ट दूर होने लगते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में मधुरता और सामंजस्य भी बढ़ता है। जिन लोगों के दांपत्य जीवन में परेशानियां चल रही होती हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है। वहीं ज्योतिष दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति को आंतरिक शांति का अनुभव होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि, वैशाख माह में यह व्रत कब रखा जाएगा।

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April Pradosh Vrat 2026 - फोटो : adobe
कब है वैशाख माह का प्रदोष व्रत ?
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 अप्रैल को शाम 6 बजकर 51 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 29 अप्रैल को रात 7 बजकर 51 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। 
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April Pradosh Vrat 2026 - फोटो : adobe
प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
  • पूजा का समय- शाम को 06 बजकर 54 मिनट से 09 बजकर 04 मिनट तक 
  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 17 मिनट से 05 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त - रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तक
 

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April Pradosh Vrat 2026 - फोटो : adobe
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
  • प्रदोष व्रत के दिन सबसे पहले शिवलिंग पर जल से अभिषेक करें और उसके बाद गंगाजल अर्पित करें।
  • इसके बाद आप शिवलिंग पर बेलपत्र, आक, शमी के फूल और धतूरा चढ़ाएं। 
  • चंदन लगाएं और ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
  • महादेव को अनाज भी अर्पित करें। इससे धन-धान्य बढ़ता है।
  • सफेद मिठाई और कुछ मौसमी फल भोग के रूप में रखें।
  • प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें, इससे व्रत का पूर्ण फल मिलता है।
  • अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
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April Pradosh Vrat 2026 - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत रखने से न केवल महादेव प्रसन्न होते हैं, बल्कि व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है। साथ ही, कुंडली के दोष भी शांत होते हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा मनचाहा साथी, प्रेम जीवन सुखमय, नौकरी, तरक्की पाने की कामना भी पूरी होती हैं। प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल की उपासना विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। इससे मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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