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Apara Ekadashi 2020: जानें अपरा एकादशी की तारीख, मुहूर्त और व्रत विधि

Sat, 09 May 2020 12:37 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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अपरा एकादशी 2020
Apara Ekadashi 2020: ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी अथवा अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार अपरा एकादशी पर्व 18 मई को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस एकादशी से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु के आशीर्वाद से व्रत करने वाले साधक का पारिवारिक जीवन सुखमय बीतता है। इस दिन व्रत रखने वाले लोगों को अपार धन की प्राप्ति होती है। इस एकादशी को करने से धन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं और साधक को अपार धन से संपन्न बनाती हैं, इसलिए इस एकादशी को अपरा एकादशी कहते हैं।
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अपरा एकादशी 2020 - फोटो : Rohit Jha
अपरा एकादशी 2020 का मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ - 17 मई 2020 को 12:44 बजे
एकादशी तिथि समाप्त - 18 मई 2020 को 15:08 बजे 
अपरा एकादशी पारणा मुहूर्त - 19 मई 2020 को प्रातः 05:27:52 से 08:11:49 बजे तक 
अवधि - 2 घंटे 43 मिनट
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अपरा एकादशी 2020 व्रत विधि
अपरा एकादशी 2020 व्रत विधि
  • व्रती एकादशी की पूर्व संध्या को सात्विक भोजन करें।
  • प्रातः सूर्योदय से पहले उठें।
  • शौच क्रिया से निवृत्त होकर स्नान-ध्यान करें।
  • व्रत का संकल्प लेकर विष्णु जी की पूजा करें।
  • पूरे दिन अन्न का सेवन न करें
  • जरूरत पड़े तो फलाहार लें।
  • शाम को विष्णु जी की आराधना करें
  • विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।
  • व्रत पारण के समय नियमानुसार व्रत खोलें।
  • व्रत खोलने के पश्चात् ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें।
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अपरा एकादशी 2020 - फोटो : Social media
अपरा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अपरा एकादशी अपार पुण्य फल प्रदान करने वाली पावन तिथि है। इस तिथि के दिन व्रत करने से व्यक्ति को उन सभी पापों से भी मुक्ति मिल जाती है, जिसके लिए उसे प्रेत योनि में जाना पड़ सकता है। पद्मपुराण में बताया गया है कि इस एकादशी के व्रत से व्यक्ति को वर्तमान जीवन में चली आ रही आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है। अगले जन्म में व्यक्ति धनवान कुल में जन्म लेता है और अपार धन का उपभोग करता है। शास्त्रों में बताया गया है कि परनिंदा, झूठ, ठगी, छल ऐसे पाप हैं, जिनके कारण व्यक्ति को नर्क में जाना पड़ता है। इस एकादशी के व्रत से इन पापों के प्रभाव में कमी आती है और व्यक्ति नर्क की यातना भोगने से बच जाता है।
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