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आरोग्य सप्तमी 2021: भगवान सूर्य ने इसी दिन सारे जगत को अपने प्रकाश से किया आलोकित

Thu, 18 Feb 2021 07:10 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
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surya puja - फोटो : अमर उजाला
आरोग्य सप्तमी या सूर्य रथ सप्तमी का पावन पर्व 19 फरवरी को मनाया जाएगा। सूर्य नारायण अपार शक्ति और तेज के देवता हैं। सूर्य से ही पृथ्वी पर जीवन और प्रकाश है। हमारी आत्मा में जो प्रकाश है वह भी सूर्य का ही प्रतिबिम्ब है। सूर्यदेव नित्यप्रति हमें दर्शन देकर कृतार्थ करते हैं। भारतीय संस्कृति में सूर्यदेव को जन-जन का आराध्य माना गया है। इस तिथि को अचला सप्तमी,रथ आरोग्य सप्तमी और यदि यह  रविवार के दिन हो तो इसे अचला भानू सप्तमी भी कहा जाता है।
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surya
विश्वकर्मा द्वारा मिला दिव्य रूप
माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सूर्य नारायण की पूजा-अर्चना के लिए श्रेयकर मानी गई है। सप्तमी तिथि को भगवान सूर्य का आविर्भाव हुआ और इसी दिन सारे जगत को अपने प्रकाश से आलोकित किया था। उन्हें अपनी भार्या संज्ञा उत्तरकुरु में एवं संतानें भी सप्तमी तिथि के दिन प्राप्त हुईं,अतः सप्तमी तिथि भगवान सूर्य को अतिप्रिय है। विश्वकर्मा द्वारा भगवान सूर्य ने इसी दिन अपना उत्तम दिव्य रूप प्राप्त किया था,इसलिए इस दिन को सूर्य जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
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surya ko jal dena - फोटो : social media
प्रत्यक्ष देवता हैं सूर्य
यह सप्तमी पुण्यदायिनी, पापविनाशिनी तथा कल्याणकारी है। भविष्य पुराण के अनुसार श्री कृष्ण ने सूर्य को संसार के प्रत्यक्ष देवता बताते हुए कहा है कि इनसे बढ़कर दूसरा कोई देवता नहीं है। सम्पूर्ण जगत इन्हीं से उत्पन्न हुआ है और अंत में इन्हीं में विलीन हो जाएगा। जिनके उदय होने से ही सारा संसार चेष्टावान होता है एवं जिनके हाथों से लोकपूजित ब्रह्मा और विष्णु तथा ललाट से शंकर उत्पन्न हुए हैं।

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surya
जब श्री राम ने की स्तुति-
वाल्मीकि रामायण में एक प्रसंग के अनुसार जब रावण से युद्ध करते हुए श्री राम थक गए और उस समय उस युद्ध को देखने आए महर्षि अगस्त्य ने श्री राम में नव ऊर्जा का संचार करने के लिए उन्हें सूर्य की स्तुति,आदित्य हृदय स्त्रोत के माध्यम से करने की आज्ञा दी और उसे करने के उपरांत श्री राम युद्ध में विजयी हुए।
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surya worship
आरोग्य के लिए सूर्योपासना-
सूर्य की रोगशमन शक्ति का उल्लेख वेद ,पुराण एवं योगशास्त्र में वर्णित है। इनमें यह भी लिखा है कि आरोग्य सुख हेतु सूर्य की उपासना सर्वथा फलदायी है।सूर्य की रोशनी के बिना जगत  में कुछ भी संभव नहीं है। पुराणों के अनुसार इस सप्तमी को जो भी सूर्य देव की उपासना तथा व्रत करते है,उनके सभी रोग ठीक हो जाते हैं। आज भी सूर्य चिकित्सा का उपयोग आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है। शारीरिक कमजोरी, हड्डियों की कमज़ोरी या जोड़ों में दर्द जैसी परेशानियों में भगवान सूर्य की आराधना करने से रोग से मुक्ति मिलने की संभावना बनती है।

सूर्य की ओर मुख करके सूर्य स्तुति करने से त्वचा रोग आदि नष्ट हो जाते हैं व नेत्रज्योति बढ़ती है,ऐसा धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। यदि निराशा से ग्रसित व्यक्ति यह पाठ करे तो उसका मनोवल पुष्ट होता है। वही सफ़ेद दाग सहित सभी प्रकार के कुष्ठ रोगों के उपचार में सूर्योपासना सहायक सिद्ध हुई है।वैदिक काल से ही हमारे ऋषि-मुनि इस बात से भली-भांति परिचित थे कि सूर्य ही जीवनप्रदायक और जीवनपोषक शक्ति है।
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Surya Arghya
सूर्य की किरणें अनेकों प्रकार के हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करती हैं। सुबह की धूप स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम होती है जब यह किरणें हमारे शरीर पर पड़ती हैं तो हमारे लिए जरूरी विटामिन 'डी' का निर्माण करती हैं। इसी कारण वास्तुशास्त्र में पूर्व और उत्तर की ओर अधिक खुला स्थान एवं दरवाज़े,खिड़कियाँ रखने की सलाह दी जाती है ताकि प्रातःकालीन सूर्य की किरणें घर व आँगन में अधिक से अधिक मात्रा में प्रवेश कर सकें और रोग फ़ैलाने वाले हानिकारक कीटाणु घर में नहीं पनप सकें।
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