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Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर कब लगेगा ग्रहण ? क्या होगा सूतक काल और भद्रा का समय, जानें 10 बड़ी बातें

Tue, 25 Aug 2026 10:52 AM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Raksha Bandhan 2026: इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण का संयोग भी बन रहा है, जिसके चलते लोगों के मन में सूतक काल, राखी बांधने के शुभ मुहूर्त और ग्रहण के प्रभाव को लेकर कई सवाल हैं। आइए इस दिन से जुड़ी 10 बड़ी बातों को जानते हैं।

 
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Raksha Bandhan 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक यह त्योहार सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। हालांकि, इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण का संयोग बनने से लोगों के मन में राखी बांधने के शुभ समय, ग्रहण की अवधि और सूतक काल को लेकर कई तरह के सवाल हैं। वहीं, भद्रा का साया भी रक्षाबंधन से एक दिन पहले रहेगा। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ समय क्या रहेगा, चंद्र ग्रहण कब लगेगा और क्या इसका प्रभाव भारत में भी माना जाएगा। आइए जानते हैं रक्षाबंधन 2026 से जुड़ी 10 बड़ी बातें।
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Raksha Bandhan 2026 - फोटो : AI
1. कब मनाया जाएगा रक्षा बंधन 2026 ?
सावन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को ही रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

2. किस समय लगेगा चंद्र ग्रहण 2026 ?
ज्योतिषियों के अनुसार, 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को चंद्र ग्रहण सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगा। ग्रहण का समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर माना जा रहा है। 
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Raksha Bandhan 2026 - फोटो : Adobe Stock
3. क्या भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण ?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल का यह आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यही वजह है कि, भारत में इस ग्रहण से जुड़े कोई भी नियम मान्य नहीं होंगे और धूमधाम से राखी का पर्व मनाया जा सकेगा।

4. क्या रहेगा सूतक काल का समय ?
चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है। लेकिन जब ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता है तो वहां सूतक संबंधी नियम लागू नहीं माने जाते। इसलिए ग्रहण के न दिखने के कारण भारत में रक्षाबंधन के दिन सूतक काल मान्य नहीं होगा। 

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Raksha Bandhan 2026 - फोटो : amar ujala
5. क्या है रक्षाबंधन 2026 का शुभ मुहूर्त ?
  • 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस दौरान अलग-अलग शुभ मुहूर्त भी रहेंगे।
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 7 बजकर 33 मिनट से सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक।
  • अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 9 बजकर 10 मिनट से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक।
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Raksha Bandhan 2026 - फोटो : adobe stock
6. कब रहेगा भद्रा का साया ?
इस साल 27 अगस्त 2026 को भद्रा का प्रभाव सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। ऐसे में भद्रा की अवधि 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए 28 अगस्त को बिना भद्रा के रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

7. कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण ?
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका तथा पश्चिमी एशिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
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Raksha Bandhan 2026 - फोटो : adobe
8. किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ग्रहण ?
28 अगस्त 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में माना जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर एक जैसा नहीं माना जाता। ज्योतिषीय गणना के अनुसार मेष, कर्क, कन्या और तुला राशि के जातकों को इस अवधि में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

9. आखिर कब लगता है चंद्र ग्रहण ?
खगोल विज्ञान के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा तिथि को ही लगता है।
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सावन पूर्णिमा - फोटो : अमर उजाला
10. ग्रहण के कारण क्या सावन पूर्णिमा मनाने में कोई बाधा होगी ?
चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण यहां इसका धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा। इसलिए सावन पूर्णिमा का पर्व सामान्य रूप से मनाया जा सकेगा। इस दिन स्नान-दान और धार्मिक कार्यों के लिए कई शुभ समय भी रहेंगे।
  • सावन पूर्णिमा स्नान-दान मुहूर्त 2026
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:37 बजे तक।
  • प्रातः संध्या: सुबह 5:14 बजे से 6:23 बजे तक।
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 बजे से 1:05 बजे तक।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:45 बजे से 3:36 बजे तक।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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