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सावन का महीना शुरू, 30 दिन भूलकर भी न करें ये सब काम, शिव भगवान नाराज हो जाते हैं

Sat, 28 Jul 2018 03:04 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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sawan - फोटो : अमरउजाला
28 जुलाई दिन शनिवार से सावन का महीना शुरू हो गया है और यह भगवान शिव को मनाने का समय है, लेकिन कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है वरना नाराज हो जाएंगे भोलेनाथ।
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sawan shivratri
चंडीगढ़ में सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि इस बार सावन में भगवान शिव की पूजा में अधिक ध्यान लगाना होगा। इस साल सावन का शुभारंभ शनिवार से हुआ है और समापन रविवार को होगा। कई सालों के बाद राजसी योग लग रहा है। पूरे 30 दिनों का सावन है और इस बार चार सोमवार होंगे।
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सावन का महीना
सेक्टर-30 स्थित शिव शक्ति मंदिर के प्रमुख पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री बताते हैं कि सावन का शुभारंभ श्रवण नक्षत्र, मकर राशि और कर्क लग्न में हो रहा है। मकर राशि का स्वामी शनि है। कर्क का स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा और शनि सम शत्रु है, इसलिए सावन का शुभांरभ राजसी योग में हो रहा है। राजसी योग में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और जप करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। पार्वती ने भी सावन में शिव जी को प्रसन्न करके उन्हें पति रूप में पाया था। इसलिए लड़कियां भी मनचाहा वर पा सकती हैं, बस सावन के महीने में सोमवार के व्रत रखने होंगे।

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sawan - फोटो : अमरउजाला
अगर निर्जल व्रत नहीं रख सकते तो फलाहर के साथ व्रत रखा जा सकता है। शिव पुराण का पाठ करें। इस पुराण में बताया गया है कि सावन में इसका पाठ और श्रवण मुक्तिदायी होता है। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र शामिल करें। तांबे का नाग भगवान शिव को अर्पित करें। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इससे कालसर्प, सर्प योग और राहु केतु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है। सूर्योदय से पहले उठकर भगवान शिव का ध्यान करें और नियमित शिवलिंग का जल से अभिषेक करें।
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sawan - फोटो : अमरउजाला
सावन के महीने में मांस-मदिरा आदि के सेवन नहीं करना चाहिए। शादी जैसा शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इसके अलावा ब्रह्मचर्य व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। सावन के महीने में एक व्रती को हरी सब्जियां और साग नहीं खाना चाहिए। शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए और न ही कांसे के बर्तन में खाना-खाना चाहिए। पूजा के समय में शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं। शिवलिंग पर न चढ़ाएं हल्दी।
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sawan - फोटो : अमरउजाला
सावन के महीने में दूध का सेवन अच्छा नही होता है। यही कारण है कि सावन में भगवान शिव का दूध से अभिषेक करने की बात कही गई है। इससे वात संबंधी दोष से बचाव होता है। सावन के महीने में दिन के समय नहीं सोना चाहिए। सावन के महीने में बैंगन नहीं खाना चाहिए। बैंगन को अशुद्ध माना गया है इसलिए द्वादशी, चतुर्दशी के दिन और कार्तिक मास में भी इसे खाने की मनाही है।
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सावन - फोटो : अमर उजाला
इस महीने में अगर घर के दरवाजे पर सांड आ आए तो उसे मार कर भगाने की बजाय कुछ खाने को दें। सांड को मारना शिव की सावारी नंदी का अपमान माना जाता है। सावन के महीने में शिव भक्तों का अपमान न करें। भगवान शिव के भक्तों का सम्मान शिव की सेवा के समान फलदायी होता है। यही कारण है कि कई लोग कांवड़ियों की सेवा करते हैं।

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सावन के पहले दिन श्रद्धालु
सावन के महीने में क्रोध में किसी को अपशब्द नहीं कहें और बड़े बुजुर्गों सम्मान करें। जीवनसाथी के साथ वाद-विवाद और अपश्ब्दों का प्रयोग हानिकारक होता है। इन दिनों शिव पार्वती की पूजा से दांपत्य जीवन में प्रेम और तालमेल बढ़ता है, इसलिए किसी बात से मन मुटाव की आशंका होने पर शिव पार्वती की पूजा करनी चाहिए।

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sawan - फोटो : अमरउजाला
सावन के महीने में प्रति दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए। इससे कई जन्मों के पाप का प्रभाव कम हो जाता है। शास्त्रों में बताया गया है सावन में सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान ध्यान करके भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। देर तक सोने से यह अवसर हाथ से चला जाता है और शिव की कृपा से वंचित रह जाते हैं।

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भगवान शिव की पूजा
सावन के प्रमुख पर्व और त्योहार
30 जुलाई - पहला सोमवार व्रत, 31 जुलाई- संकष्ठी गणेश चतुर्थी व्रत, 6 अगस्त- दूसरा सोमवार व्रत, 8 अगस्त- कामदा एकादशी व्रत, 9 अगस्त- प्रदोष व्रत, 11 अगस्त- हरियाली अमावस्या व शनैश्चरी अमावस्या, 13 अगस्त- तीसरा सोमवार व्रत, 15 अगस्त- नागपंचमी, 20 अगस्त- चौथा सोमवार व्रत, 22 अगस्त- पुत्रदा एकादशी व्रत, 23 अगस्त- प्रदोष व्रत, 26 अगस्त- रक्षा बंधन, स्नान दान की पूर्णिमा
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shiv puja
पूजन में शिव मंत्र का जप करें
सावन के महीने में शिव पूजन के साथ ही शिव मंत्र 1- ऊँ महाशिवाय सोमाय नम:। या शिव मंत्र 2-ऊँ नम: शिवाय। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग सर्वश्रेष्ठ रहता है। शिव परिवार (प्रथम पूज्य श्री गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी, नाग देवता) का भी पूजन करें।
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