104 साल बाद 27 जुलाई को सदी का सबसे लंबा ग्रहण लगने जा रहा है। अगर आप भी इसके प्रकोप से बचना चाहते हैं तो जानिए क्या करें और क्या न करें। ज्योतिषियों ने कुछ उपाय बताए हैं, जिससे ग्रहण का असर नहीं पड़ेगा।
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चंद्रग्रहण
बता दें कि शनि मंदिर के शास्त्री पंडित उदयवीर ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा पर 27 जुलाई की रात खग्रास चंद्रग्रहण होगा। यह 3 घंटे 55 मिनट का होगा। पूरे देश के साथ-साथ हरियाणा के यमुनानगर में और आसपास के क्षेत्र में भी इसे देखा जा सकेगा।
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चंद्रग्रहण
पंडित उदयवीर ने बताया कि इसी दिन गुरु पूर्णिमा भी है। ग्रहण का सूतक लगने से पहले गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाना श्रेष्ठ है। मंदिरों में भी ग्रहण का सूतक लगने से पहले आरती व पूजा हो जाएगी। शाम की आरती सूतक लगने के कारण दोपहर में होगी।
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चंद्रग्रहण
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किस राशि पर कैसा असर
पंडित उदयवीर ने बताया कि मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि पर चंद्रग्रहण का अच्छा असर पड़ेगा। वहीं मिथुन, तुला, मकर और कुंभ राशि पर ठीक प्रभाव नहीं रहेगा। इसके अलावा वृषभ, कर्क, धनु और कन्या पर चंद्रग्रहण का प्रभाव मिश्रित रहेगा।
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चंद्रग्रहण
- फोटो : amar ujala
चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी के आ जाने को ही चंद्रग्रहण कहते है। चंद्रग्रहण तब होता है जब सूर्य व चंद्रमा के बीच पृथ्वी इस प्रकार से आ जाती है कि पृथ्वी की छाया से चंद्रमा का पूरा या आंशिक भाग ढक जाता है। ऐसी स्थिति में पृथ्वी सूर्य की किरणों के चंद्रमा तक पहुंचने में अवरोध लगा देती है। तब पृथ्वी के उस हिस्से में चंद्रग्रहण नजर आता है।
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चंद्रग्रहण
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पंडित उदयवीर ने बताया कि ग्रहण के समय जन्मे बच्चों को जीवन में अत्याधिक परिश्रम करना पड़ता है। चंद्रग्रहण के समय जन्मे बच्चों को तीक्ष्ण बुद्धि के होते हैं परंतु उनकी शिक्षा बाधित होती है। ऐसे ही सूर्य ग्रहण में जन्मे बच्चों को पिता के सुख में कमी रहती है तथा अधिक समय अपने माता-पिता से दूर रहते है।
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चंद्रग्रहण
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क्या दान करें
पंडित उदयवीर ने बताया कि जिनकी कुंडली में चंद्रग्रहण का दोष हो तो उनको अपने जीवनकाल में पड़ने वाले हर पूर्ण सूर्य ग्रहण एवं चंद्रग्रहण के समय सूर्य अथवा चंद्रमा का दान करना चाहिए। इसमें काले तिल, सफेद तिल, काली उड़द एवं गेहूं शामिल है। किसी एक ग्रहण पर तुला दान अवश्य करें।
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चंद्रग्रहण
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क्या करें, क्या न करें
चंद्रग्रहण में 3 पहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बुजुर्ग, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं। जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। ग्रहण वेद के प्रारंभ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग नहीं करना चाहिए। ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।
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चंद्रग्रहण
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चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से देख सकते हैं। आप चाहें तो खुले मैदान या फिर पास के किसी पार्क में जाकर चांद का दीदार कर सकते हैं। ग्रहण के समय तुलसी और शमी के पेड़ को नहीं छूना चाहिए। कैंची, चाकू या फिर किसी भी धारदार वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए। किसी को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देना चाहिए।
ग्रहण में किसी भी भगवान की मूर्ति और तस्वीर को स्पर्श नहीं चाहिए। इतना ही नहीं सूतक के समय से ही मंदिर के दरवाजे बंद कर देने चाहिए। ग्रहण के दिन सूतक लगने के बाद छोटे बच्चे, बुजुर्ग और रोगी के अलावा कोई व्यक्ति भोजन नहीं करे। गर्भावस्था की स्थिति में ग्रहण काल के समय अपने कमरे में बैठ कर के भगवान का भजन ध्यान मंत्र या जप करें।