27 जुलाई को सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण और पूर्णिमा दोनों एक साथ हैं। इस दिन लोगों को एक काम भूलकर भी नहीं करना चाहिए। अगर करेंगे तो मुसीबत झेलेंगे।
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lunar eclipse
चंडीगढ़ में सेक्टर-45 निवासी सिद्धांत ज्योतिषाचार्य और कर्मकांडी आचार्य रवींद्र कुमार मिश्र कहते हैं कि इस बार चंद्रग्रहण तीन घंटे 55 मिनट का होगा। अब तक सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण 1700 साल पहले पड़ा था। आषाढ़ पूर्णिमा की रात 27 जुलाई को आधी रात में खग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। यह खग्रास चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक दोपहर बाद 2.54 बजे प्रारंभ होगा। ग्रहण रात 11.54 मिनट से सुबह 3 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। सूतक लगने के कारण शाम के समय मंदिर के कपाट नहीं खुलेंगे।
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lunar eclipse
वहीं, ग्रहण के दिन ही गुरु पूर्णिमा भी है तो इस दिन मोटरसाइकिल दुर्घटना होने की आशंका अधिक रहती है। कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो और अमेरिका की प्रिंसेटन यूनिवर्सिटी के एक संयुक्त अध्ययन में कहा गया है कि ड्राइविंग के दौरान हलका सा भी ध्यान भटकना बड़े हादसे का कारण होता है। ऐसे में पूर्णिमा के कारण चांद अधिक बड़ा और रात को आसमान में अधिक चमकदार होता है। इसके चलते ड्राइवर में क्षणिक मनबहलाव यानी ध्यान भटकने की हल्की सी गुंजाइश भी सड़क हादसों को न्यौता देती है। मोटरसाइकिल सवार इससे अधिक प्रभावित होते हैं।
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इसके लिए शोधार्थियों ने पूर्णिमा की रातों और साधारण रातों (पूर्णिमा के दिन और उसके एक हफ्ते के बाद वाले दिन) को होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या का आंकलन किया। जिसमें पाया गया कि साधारण रातों की तुलना में पूर्णिमा की रात हुई दुर्घटनाओं की संख्या अधिक थी। हिन्दू धर्म में माघ पूर्णिमा को बहुत खास माना जाता है। इस बार गुरु पूर्णिमा 27 जुलाई 2018 दिन शुक्रवार को पढ़ रही है और इसी दिन चंद्रग्रहण लग रहा है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से अमृत वर्षा करते हैं।
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Lunar eclipse
देवालय पूजक परिषद् के कोषाध्यक्ष और सेक्टर 18 स्थित राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दूबे के अनुसार, यह ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा और उत्तराषाढ़ नक्षत्र के अंतिम दो घटी एवं श्रवण नक्षत्र के आद में खग्रास चंद्र ग्रहण होगा। उत्तराषाढ़ के चतुर्थ चरण में होने के कारण उत्तराषाढ़ के चतुर्थ चरण एवं श्रवण नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के लिए यह ग्रहण घातक है। विशेषकर मकर राशि के जातकों के लिए ग्रहण हानिकारक रहेगा। कुछ विशिष्ट व्यक्तियों एवं शासकों के लिए भी संघर्षमय स्थिति उत्पन्न करेगा।
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चंद्रग्रहण
- फोटो : amar ujala
खग्रास चंद्र ग्रहण के समय मकरस्थ चंद्र के साथ स्थित मंगल और केतु पर राहु, सूर्य और बुध की दृष्टि है। सूर्य राहु के साथ शनि का षडष्टक योग भी बन रहा है, इसलिए राजनीतिज्ञों और शासकों में भी उथल-पुथल रहेगा। देश के कुछ भागों में भारी प्राकृतिक आपदा से जनधन की हानि होगी। चूंकि चंद्रमा क्रूर ग्रह से युक्त एवं सूर्य राहु से दृश्य होने के कारण राजनीतिज्ञों के लिए चिंताजनक है। खग्रास चंद्र ग्रहण आषाढ़ मास में घटित हो रहा है। यह कुछ प्रांतों में सूखे से जनजीवन त्रस्त रहेगा।
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चंद्रग्रहण
- फोटो : amar ujala
इस प्रकार होगा ग्रहण का स्पर्श और आदि काल
ग्रहण----------------समय
ग्रहण का स्पर्श--------23:54
खग्रास प्रारंभ---------01:00
ग्रहण का मध्य काल---00:54
खग्रास समाप्त--------02:43
ग्रहण का मोक्ष काल---03:49
ग्रहण का पर्व काल----03:55
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चंद्रग्रहण
- फोटो : amar ujala
मकर राशीस्थ चंद्र ग्रहण फल... मेष- इस राशि केलिए सुख संपत्ति का लाभ होगा। वृष- मान अपमान का योग है, सावधान रहिए। मिथुन- शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक परेशानी होगी। कर्क- पति पत्नी परेशान होंगे।
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सिंह- सामान्य सुख का योग। कन्या- मानसिक परेशानी होगी। तुला- इस राशि वालों के लिए कष्टकारक होगा। वृश्चिक- जन-धन का लाभ। धनु- जन-धन की हानि।
मकर- विशेष कष्टकर और घातक सरेग है। कुंभ- व्यापार नौकरी और विद्या की हानि। मीन- हर प्रकार से लाभ, सुख संपति की प्राप्ति।
मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए यह ग्रहण किसी राज योग से कम नहीं है। इनके लिए अत्यंत लाभकारी है। अन्य आठ राशि वालों के लिए कष्टदायक है। वृष मिथुन कर्क कन्या तुला धनु मकर और कुंभ राशियों के लिए यह खग्रास अशुभ है। स्नान, दान, जप आदि करना शुभ रहेगा।