नवरात्रि पर नौ दिनों तक मां के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का समापन कन्या पूजन से होता है। आइए जानते हैं इसकी सही विधि...
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kanya pujan
- फोटो : अमर उजाला
पंडित विपिन चंद्र जोशी ने बताया कि कन्या पूजन को कंजक भी कहा जाता है। इसे अष्टमी या फिर नवमी पर किया जाता है। इस दिन छोटी बच्चियों को देवी का रूप मान कर पूजा जाता है। साथ ही उनका आशीर्वाद लिया जाता है। माना जाता है कि उनका आशीर्वाद मां की कृपा लेकर आता है। इसलिए जो लोग नवरात्र में व्रत नहीं भी रखते, वे भी कन्या पूजन जरूर करते हैं।
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कन्या पूजन
कन्या पूजन पूरी विधि से किया जाए यह बेहद जरूरी है। ऐसा न करने पर मां रूठ जाती हैं। कन्या पूजन के बिना नवरात्रि पूजा के फल की प्राप्ति नहीं होती है।
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कन्या पूजन
कन्या पूजन में नौ कन्याओं को जरूर बैठाएं। सही विधि जानने के लिए अगली स्लाइड के लिए टैप करें।
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कन्या पूजन
सबसे पहले फूल की थाली में जल में डालकर कन्याओं के चरण धोएं। ऐसा करने से पापों का शमन होता है। उनको तिलक लगाकर पंक्तिबद्ध बैठाएं। हाथ में रक्षासूत्र बांधें और उनके चरणों में पुष्प चढ़ाए।
इसके बाद नई थाली में कन्याओं को पूड़ी, हलवा, चना आदि श्रद्धा पूर्वक परोसें। फिर मिष्ठान और प्रसाद देकर कुछ द्रव्य और वस्त्र का दान करें। जब कन्याएं भोजन कर लें तो उन्हें देवी मानकर उनकी आरती करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।