Bangladesh 7 Shakti Peeth: बांग्लादेश इन दिनों गंभीर राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमजोरी और लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने सामान्य जनजीवन को हिला के रख दिया है। इस माहौल में सिर्फ सत्ता व्यवस्था के साथ देश की सांस्कृतिक विरासत भी खतरे में दिखाई दे रही है। खास तौर पर सनातन परंपरा, जो कभी बंगाली अस्मिता का अभिन्न हिस्सा रही है, आज वह अस्तित्व की लड़ाई लड़ती नजर आती है। मंदिरों पर हमले, मूर्तियों की तोड़फोड़ और धार्मिक स्थलों का अपमान यह संकेत देती है कि आस्था से जुड़ी धरोहरें अब सबसे असुरक्षित हैं।
बांग्लादेश, जिसे कभी अविभाजित बंगाल कहा जाता था, वह शाक्त परंपरा का एक प्रमुख केंद्र रहा है। देवी उपासना, तंत्र साधना और शक्तिपीठों की परंपरा यहां सदियों तक फलती-फूलती आई हैं। देवी सती के अंगों के पतन से जुड़े कई शक्तिपीठ आज भी इस भूमि पर स्थित हैं, जो केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक स्मृति के प्रतीक हैं। दुर्भाग्य से आज ये पवित्र स्थल भी असुरक्षा की छाया में आ गए हैं।
शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव के तांडव के दौरान देवी सती के अंग जहां-जहां गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। दुर्गासप्तशती, तंत्र चूड़ामणि और शक्ति पीठ स्तोत्र जैसे ग्रंथों में इन पीठों का उल्लेख किया गया है। बांग्लादेश में स्थित प्रमुख शक्तिपीठों में जसोरेश्वरी, सुगंधा, भवानी (चट्टल), जयंती, महालक्ष्मी, स्रवानी और अपर्णा शक्तिपीठ प्रमुख माने जाते हैं। आइए इसके बारे में अधिक जानते हैं...