फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Adhik Maas Shivratri: अधिक मासिक शिवरात्रि व्रत आज, 27 साल बाद बनने जा रहा दुर्लभ योग

Sat, 13 Jun 2026 12:18 AM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Adhik Maas Shivratri 2026: आज से शुरू हो रहे ज्येष्ठ अधिक मास में शिवरात्रि पर 27 साल बाद दुर्लभ गौरी योग का संयोग बन रहा है, जिससे यह व्रत और भी शुभ व फलदायी हो गया है। जानें अधिक मासिक शिवरात्रि की तिथि, मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।
विज्ञापन
1 of 5
कब है अधिक मासिक शिवरात्रि 2026 - फोटो : AI
Adhik Maas Shivratri 2026: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है और भक्तों को शिव भक्ति तथा साधना का विशेष अवसर प्रदान करती है। आज, 13 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास के दौरान आने वाली मासिक शिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि इस बार लगभग 27 वर्षों बाद गौरी योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह विशेष योग इस व्रत को और अधिक फलदायी तथा शुभ बना रहा है।

कब है अधिक मासिक शिवरात्रि 2026
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 13 जून 2026 को शाम 4 बजकर 7 मिनट से शुरू होगी और 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। चूंकि शिवरात्रि की पूजा प्रदोष काल में करना श्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए इस बार व्रत और पूजन 13 जून, शनिवार के दिन किया जाएगा।

Pitru Paksha 2026: इस साल कब से शुरू हो रहे हैं पितृ पक्ष? जानें श्राद्ध की सही तिथियां और विधि
विज्ञापन

2 of 5
शुभ मुहूर्त का महत्व - फोटो : adobe stock
शुभ मुहूर्त का महत्व
मासिक शिवरात्रि के दिन प्रदोष काल और मध्य रात्रि का समय भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा दिन में भी कुछ शुभ समय ऐसे होते हैं, जब पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। सुबह 7:07 बजे से 8:51 बजे तक शुभ चौघड़िया, शाम 7:19 बजे से 8:34 बजे तक लाभ चौघड़िया और रात 11:04 बजे से 12:22 बजे तक अमृत चौघड़िया रहेगा। वहीं प्रदोष काल शाम 6:34 बजे से 8:04 बजे तक रहेगा, जो शिव पूजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
 
विज्ञापन

3 of 5
दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग - फोटो : adobe stock
दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग
ज्योतिषीय दृष्टि से यह शिवरात्रि बेहद खास मानी जा रही है। इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 1999 में बना था, जब ज्येष्ठ अधिक मास में शिवरात्रि आई थी। इस बार चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे, जिससे गौरी योग का निर्माण होगा। इस योग को वैवाहिक सुख, पारिवारिक समृद्धि और इच्छाओं की पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव और पार्वती की संयुक्त पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
 

4 of 5
पूजा विधि - फोटो : adobe stock
पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। संभव हो तो रुद्राभिषेक भी करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें और शिव चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
धार्मिक महत्व - फोटो : adobe stock
धार्मिक महत्व
अधिक मास में आने वाली मासिक शिवरात्रि को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। गौरी योग के दुर्लभ संयोग के कारण वर्ष 2026 की यह शिवरात्रि भक्तों के लिए पुण्य अर्जित करने का एक अनमोल अवसर बनकर आई है।

Lakshmi Mantra: चुपचाप करें मां लक्ष्मी के इन चमत्कारी मंत्रों का जाप, खिंचा चला आएगा धन और वैभव
Heavy Rainfall: क्यों होती है भीषण बारिश? क्या बताया गया है धर्म और पुराणों में अतिवृष्टि और अनावृष्टि का कारण

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें