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Martyr Vijay Kumar: दुल्हन के लिबास में तस्वीर चूमकर दी शहीद पति को अंतिम विदाई, छह साल के बेटे ने दी मुखाग्नि

Mon, 21 Aug 2023 10:19 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
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दुल्हन के लिबास में शहीद पति को अंतिम विदाई। - फोटो : अमर उजाला
लद्दाख के लेह जिले में सड़क हादसे में शहीद हुए हिमाचल प्रदेश के शिमला के नेहरा पंचायत के डिमण गांव निवासी हवलदार विजय कुमार का सोमवार को अंतिम संस्कार किया गया। हेलिकाप्टर से शहीद  के पार्थिव शरीर को पहले चंडीगढ़ से अनाडेल हेलीपैड में लाया गया। इसके बाद धामी बस अड्डे से पैतृक गांव तक पार्थिव देह ले जाने के दौरान जगह-जगह लोगों की भीड़ रही।

25 किलोमीटर पैदल यात्रा करते हुए ग्रामीण और जनप्रतिनिधि शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर जैसे ही डिमण गांव पहुंचे, हर तरफ चीख-पुकार का माहौल हो गया। इस दौरान हर आंख नम हो गई।  ग्रामीणों ने फूलों से शहीद को श्रद्धांजलि दी। शहीद की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। पत्नी निर्मला ने दुल्हन के लिबास में शहीद पति को अंतिम विदाई दी। शहीद के बेटे दक्ष (6) ने ताऊ संजीव की गोद से पिता की चिता को मुखाग्नि दी तो हर आंख भर आई।
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तस्वीर चूमकर दी शहीद पति को अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
जब तक सूरज चांद रहेगा, विजय तेरा नाम रहेगा... की गूंज के बीच निर्मला ने पति की तस्वीर को चूमा तो हर किसी की आंख नम हो गई।  शहीद की अंतिम यात्रा में भी जब तक सूरज चांद रहेगा, विजय तेरा नाम रहेगा गूंजता रहा। इस दौरान मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी गांव में पहुंचकर संवेदना व्यक्त की।
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शहीद विजय कुमार की अंतिम यात्रा। - फोटो : अमर उजाला
12 मई को ड्यूटी पर गए थे विजय
19 अगस्त को लद्दाख के लेह जिले में सड़क दुर्घटना में सेना के दो जेसीओ समेत नौ जवानों की मौत हो गई थी। इसमें जिले के शिमला (ग्रामीण) विधानसभा क्षेत्र के उप तहसील धामी के नेहरा पंचायत के सैनिक विजय कुमार (36) भी वीरगति को प्राप्त हुए है।

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शहीद की अंतिम यात्रा में जनसैलाब। - फोटो : अमर उजाला
2006-07 से 217 मीडियम आर्टेलेरी रेजिमेंट में लेह-लद्दाख में तैनाती थी। करीब डेढ़ महीने की छुट्टी के बाद 12 मई को ड्यूटी पर गए थे। पंचायत प्रधान मीरा देवी ने बताया कि पूरे रिति-रिवाज के साथ शहीद विजय का अंतिम संस्कार किया गया है।
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शहीद विजय कुमार के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
शहीद विजय कुमार का जन्म नेहरा पंचायत के डिमण गांव में हुआ था। उनकी पत्नी निर्मला, बेटा अंशुल डेढ़ साल और दूसरा बेटा 6 साल का दक्ष पिता की शहादत से सदमे में हैं। माता कौशल्या और पत्नी निर्मला तिरंगे में लिपटी विजय की पार्थिव देह को देखकर बेसुध हो गईं। विजय के पिता बाबू राम मध्य वर्गीय परिवार से संबंधित है। परिवार में विजय सबसे छोटा था। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, जबकि भाई निजी व्यवसाय करते हैं।
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बच्चों ने तिरंगा हाथ में लेकर दी शहीद को अंतिम विदाई। - फोटो : अमर उजाला
धामी से मांदरी-दाडगी-सौहल-पनोही-नेहर-डिमण तक करीब 25 किमी लंबी यात्रा के बाद शहीद का पार्थिव शरीर दोपहर 1:45 बजे घर पहुंचा। बच्चे हाथ में तिरंगा लिए खड़े थे।
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