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3600 व्हाट्सएप ग्रुप संभाल रहे भाजपा के 'सुपर एडमिन' राहुल डोगरा, पढ़िए इनके काम करने का तरीका

Wed, 17 Apr 2019 11:42 AM IST
अरविन्द ठाकुर प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
लोकसभा चुनाव की जंग सोशल मीडिया पर भी लड़ी जा रही है। सियासी दलों ने करीब डेढ़ माह पहले ही सोशल मीडिया में लड़ाई के लिए वॉर रूम बना लिए हैं। भाजपा के सुपर एडमिन राहुल डोगरा प्रदेश में पार्टी के आधिकारिक 3600 व्हाट्सएप ग्रुपों को संभाल रहे हैं। पंचायत स्तर से लेकर संसदीय क्षेत्र तक और राज्य स्तरीय व्हाट्सएप नेटवर्क की बदौलत राहुल भाजपा के लिए सियासी समर में चक्रव्यूह रच रहे हैं। इन ग्रुपों में हर विधानसभा क्षेत्र में मौजूद पांच पांडवों (सदस्यों) के जरिये वह लोगों तक पार्टी का चुनावी कंटेंट पहुंचा रहे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
मूल रूप से कांगड़ा जिले के देहरा के रहने वाले राहुल डोगरा को विधानसभा चुनाव से पहले साल 2016 में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हिमाचल भाजपा के आईटी विंग में बतौर सह संयोजक शामिल किया था। इसके बाद विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल ने प्रदेश भर में हर बूथ स्तर पर करीब 8 हजार व्हाट्स एप ग्रुप बनाकर कार्यकर्ताओं से संवाद साधा। हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद यह संख्या घटकर 4000 पहुंच गई।
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- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भी राहुल के नेतृत्व वाली टीम ने काम जारी रखा। लोकसभा चुनाव की घोषणा तक भाजपा की आईटी टीम ने करीब 3600 ग्रुप तैयार कर लिए। भले ही ग्रुपों की संख्या कम हो गई, लेकिन हर ग्रुप में पचास से ढाई सौ लोगों को जोड़कर हर लोकसभा क्षेत्र के करीब डेढ़ लाख लोगों से सीधा संपर्क बना लिया। इन ग्रुपों को मैनेज करने के लिए राहुल रोजाना बारह से चौदह घंटे काम करते हैं। साथ ही इस काम को पूरा करने के लिए राहुल के नेतृत्व में प्रदेश में करीब 400 लोगों की कोर टीम काम करती है।

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- फोटो : अमर उजाला
विधानसभा स्तर पर पांडव बने ताकत- आईटी विंग के सह संयोजक राहुल बताते हैं कि हर लोकसभा क्षेत्र के 17 विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग टीम है। हर विस क्षेत्र की टीम में एक समन्वयक समेत पांच सदस्य हैं, जिन्हें पांडव कहा जाता है। हर पांडव के अधीन 20 से 25 लोगों की अलग से टीम होती है जो बूथ स्तर तक काम करती है। इन्हीं पांडवों की सेना की मदद से कंटेंट को अलग-अलग ग्रुप तक पहुंचाया जाता है।
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ऐसे वायरल होता है कंटेंट- अगर किसी संदेश को पूरे प्रदेश की जनता तक पहुंचाना है तो उसके लिए पहला मैसेज चारों लोकसभा क्षेत्र के ग्रुप में डाला जाता है। इसके बाद इन ग्रुपों में मौजूद पांडव अपनी सेना के जरिये संगठनात्मक जिला स्तर और वहां से पंचायत स्तर तक पहुंचाते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए भाजपा ने पूरा ढांचा तैयार कर रखा है।
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हिमाचल के प्रयोग को अन्य राज्यों में अपनाया- भाजपा के प्रदेश आईटी संयोजक चेतन बरागटा बताते हैं कि हिमाचल पहला राज्य था, जिसने इस तरह का व्हाट्सएप नेटवर्क विधानसभा चुनाव के दौरान तैयार किया था। अब अन्य प्रदेशों में भी नेटवर्क खड़ा किया गया। चेतन ने कहा कि विधानसभा चुनाव में आईटी सेल की सफलता के बाद ही टीम को और विस्तार दिया गया और आज यह चुनाव प्रचार का सबसे महत्वपूर्ण अंग बन गया है।
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