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अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेला: ऐतिहासिक पड्डल मैदान देवलोक में हुआ तब्दील, हजारों श्रद्धालुओं ने नवाया शीश

Mon, 20 Feb 2023 08:27 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
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मंडी शिवरात्रि में पहुंचे देवी-देवता। - फोटो : संवाद
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले के लिए पधारे 188 देवी-देवता सोमवार को मंडी के पड्डल मैदान में भक्तों को दर्शन देने के लिए विराजमान हो गए। इसी के साथ ऐतिहासिक पड्डल मैदान पूरी तरह से देवलोक में तब्दील हो गया। मैदान पर अधिकांश देवी-देवताओं ने अपने परंपरागत स्थानों पर ही आसन ग्रहण किया है। जबकि, कुछ देवी-देवताओं ने पड्डल मैदान की पौड़ियों पर अपना स्थान ग्रहण किया है। देवी-देवताओं के दर्शन के लिए सोमवार को हजारों श्रद्धालुओं ने पड्डल मैदान पहुंचकर शीश नवाया। देवी-देवताओं ने भी उन्हें दर्शन दिए और उनके कष्टों का भी निवारण किया।

उधर, छोटी काशी का दिनभर का नजारा भी धार्मिक बना रहा। सुबह से शाम तक देवी देवताओं का पड्डल से और शहर से अपने देवलुओं के साथ आना-जाना लगा रहा। इस मौके पर श्रद्धालुओं कई देवी-देवताओं के भव्य मिलन के भी गवाह बने। नाचते-गाते देवलुओं की गहमागहमी और बजंतरियों के वाद्ययंत्रों की धुनों से छोटी काशी का माहौल धार्मिक हो उठा।
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श्रद्धालुओं ने नवाया शीश। - फोटो : संवाद
सर्व देवता सेवा समिति के प्रधान शिवपाल शर्मा ने कहा कि कॉलेज मैदान में भवन निर्माण के चलते इस बार देवी-देवताओं के लिए पड्डल मैदान में बैठने की जगह बनाई गई है।
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देव मिलन। - फोटो : संवाद
प्रशासन की पहल को सराहा
महाशिवरात्रि मेले में आए देवी-देवता इस बार पड्डल मैदान पर अपने रथों, देवलुओं और गूर व पुजारी के साथ विराजमान हुए हैं। मैदान क्षेत्र में सभी देवी-देवताओं के दर्शन श्रद्धालुओं को हो रहे हैं। प्रशासन की इस पहल को देव समितियों ने सराहा है। देवता के कारदारों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें इस बार मैदान पर एक साथ बैठाया गया है। इस व्यवस्था को आगे भी कायम रखा जाए।

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देवी-देवता। - फोटो : संवाद
कारदार, पुजारी बोले, बारिश से बचने का भी हो प्रबंध
माता मेहणी के पुजारी यादवेंद्र सिंह, काली चामुंडा के सचिव बीरी सिंह, महाकाली पुरानी मंडी के कारदार सुनील सहित अन्य देवताओं के कारदारों ने प्रशासन के प्रबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रशासन देवताओं के बैठने के लिए अस्थायी शेड बना देता तो अच्छा होता। बारिश के पानी से बचने के लिए हर बार देवताओं के रथों को उठा कर सुरक्षित जगह आश्रय लेना पड़ता है। कहा कि जिस तरह कुल्लू दशहरा में देवताओं के लिए मेला मैदान में अस्थाई शेड बनाए जाते हैं उसी तरह मंडी में भी शेड बना कर देवताओं को बिठाया जाए। ताकि, बारिश होने पर देव रथ सुरक्षित रहें और देवलू भी आसानी से बैठे रहें।
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मेले में पहुंचे देवी-देवता। - फोटो : संवाद
देवलू नाटी और वाद्य यंत्र स्पर्धा के लिए पंजीकरण शुरू
वहीं,  महाशिवरात्रि महोत्सव में देवलू नाटी और वाद्य यंत्र स्पर्धा के लिए पंजीकरण की पंजीकरण की संस्कृति सदन कांगणीधार में प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई। पहले दिन देवलू नाटी के लिए 57 दलों और वाद्य यंत्र स्पर्धा के लिए 16 बंजतरी दलों ने पंजीकरण कराया। मंगलवार दोपहर 12 बजे से पहले तक पंजीकरण होगा।
 
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वाद्ययंत्र - फोटो : संवाद
संस्कृति सदन में मंगलवार को सुबह दस बजे से देवलू नाटी व वाद्ययंत्र प्रतियोगिता का आयोजन होगा। शाम 6 बजे से नाटक मंचन होगा। जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने बताया कि 24 फरवरी तक प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि देवलू नाटी व वाद्ययंत्र प्रतियोगिता और नाटक मंचन के लिए प्रत्येक कलाकार एक ही संस्था या दल के माध्यम से अपना पंजीकरण करवा सकता है।
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