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अब एक टेस्ट में आसानी से होगी कैंसर की पहचान, वैज्ञानिकों ने किया अविष्कार

Fri, 26 Apr 2019 10:06 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
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कैंसर
कैंसर रोगियों की पहचान अब एक ही टेस्ट में आसानी से हो सकेगी। आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने कोशिकाओं के अंदर पानी का वितरण दिखाने के लिए फ्लूरोसेंट नैनो डॉट्स का आविष्कार किया है। 
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शोधकर्ता टीम के प्रभारी - फोटो : अमर उजाला
शोध में खुलासा हुआ है कि सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर सैल के अंदर पानी का वितरण भिन्न होता है। इस शोध से कैंसर सैल का पता लगाने का आसान विकल्प दिया जा सकता है। शोधकर्ता टीम के प्रभारी एसोसिएट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज, आईआईटी मंडी डॉ. चयन के नंदी ने कहा कि इसे हाल ही में जर्नल ऑफ फिजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित किया गया।
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शोधकर्ताओं के अनुसार फ्लूरोसेंट नैनोडॉट मैटीरियल नैनोमीटर के स्केल का है। यानी इंसान के बाल की मोटाई से 8,000,00 गुना छोटा है। नैनोडॉट कार्बन का बना है और इसमें हाइड्रोफिलिक (पानी से आकर्षण) और हाइड्रोफोबिक (पानी से विकर्षण) दोनों हिस्से हैं।

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- फोटो : social media
 जैसा कि साबुन के अणु में होता है। एक ही नैनोडॉट के अंदर पानी के आकर्षक और विकर्षक हिस्से होने की वजह से ये खुद को पानी के हाइड्रोजन बंधन की तरह व्यवस्थित कर लेते हैं। 
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कोशिकाओं में नैनोडॉट डालकर यह दिखाया कि हाइड्रोजन बंधन और पानी के कंटेंट (मात्रा) कोशिका के अलग-अलग हिस्सों में भिन्न हैं। बड़ी बात यह कि सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर कोशिकाओं में हाइड्रोजन बंधन नेटवर्क भिन्न दिखा। उनके इस कार्य से पहली बार यह प्रमाण मिला कि सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर सेल्स के न्युक्लीआई में अधिक मात्रा में पानी स्वतंत्र रूप में पाया जाता है।
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यह है हाइड्रोजन बंधन
शोधकर्ताओं के अनुसार इंसान का शरीर खरबों कोशिकाओं का बना है, जिनके अपने-अपने काम निर्धारित हैं। कोशिकाओं के कई घटक होते हैं। इनमें एक में सर्वाधिक 80 प्रतिशत पानी है। एक-दूसरे के नजदीक पानी के अणु आपस में कमजोर बंधन बलों से जुड़े होते हैं, जिन्हें हाइड्रोजन बंधन कहते हैं। हाइड्रोजन बंधन गतिमान होते हैं और पानी के इसके परिवेश से प्रतिक्रियाओं के अनुसार बदलते हैं।
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