शिमला के कोटखाई में दांदी के जंगल में घटनास्थल से दस फीट दूर गुड़िया के साथ दुष्कर्म का दावा करने वाली पुलिस सवालों के घेरे में है। पुलिस जांच में कई कमजोर कड़ियां हैं, जिनसे आने वाले दिनों में सीबीआई की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आइए जानते हैं-
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पुलिस का दावा है कि जिस गड्ढे में गुड़िया का शव मिला, उससे दस फीट दूर दरिंदगी हुई। लेकिन यह साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य पुलिस नहीं पेश कर पाई है।
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घटनास्थल से एक आरोपी का डेरा करीब 400 मीटर है। यह खुद में सवाल है कि आखिर दरिंदों ने अपने घर के साथ खुले में शव क्यों फेंक दिया। ‘अमर उजाला’ की टीम शुक्रवार को उस ढारे तक पहुंची तो वहां एक पिकअप खड़ी थी। यह वही पिकअप है, जिसे आरोपी चलाता था।
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पुलिस की माने तो गुड़िया को इसी गाड़ी में लिफ्ट दी गई थी। पुलिस का यह भी दावा है कि पिकअप से उसे बाहर खींचा गया था। उसके बालों में लगे क्लिप भी सड़क पर मिले थे। हैरत है कि पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल पिकअप को अब तक कब्जे में नहीं लिया है। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों के गंभीर सवालों को इस तरह की जांच के तरीके से बल मिलता दिख रहा है।
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शव को लड़की के मामा ने सुबह पौने सात बजे देखा। उसके पिता को मोबाइल पर इसकी जानकारी दी। परिजनों का दावा है कि इसके तुरंत बाद पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन वह मौके पर करीब तीन घंटे देर से पहुंची। तब तक वहां सैकड़ों लोगों का जमावड़ा लग गया था। ऐसे में मौके पर साक्ष्य मिलने की उम्मीद भी धूमिल हो गई।
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इसके बाद पुलिस ने टेक्निकल जांच को आधार बनाकर इलाके के संदिग्ध युवकों से पूछताछ शुरू की। इसे आधार बनाकर एक आरोपी की गिरफ्तारी का दावा कर दिया। इसके बाद पांच और लोगों को आरोपी बताकर हवालात में डाल दिया। यहीं से स्थानीय लोगों का पुलिस जांच से भरोसा उठने लगा।
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अगर नेपाली मजदूरों का वारदात में हाथ होता तो वह क्यों इतने दिन तक पुलिस के आने का इंतजार करते? या फिर अपने डेरे के नजदीक गुड़िया के शव को फेंकते? यह बात भी लोगों के गले नहीं उतर रही है कि गुड़िया के साथ जंगल में ही दुष्कर्म कर उसी दिन उसकी हत्या की गई।
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने भी यह सवाल खड़ा किया है कि प्रदेश में कई मामले हुए हैं, जिनमें नेपाली घटना कर तुरंत फरार हो गए। इसके अलावा दो दिन तक जंगल में लड़की का शव जंगली जानवरों से सुरक्षित कैसे रहता। परिजनों ने भी पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले पुलिस यह कह रही थी कि शव को यहां कहीं दूसरी जगह से लाकर फेंका गया है, लेकिन अब कुछ और ही बयां कर रही है।