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जब शबाना आजमी को फैज अहमद फैज ने लगाई थी डांट, किस्से पर आज भी लगते हैं ठहाके

Sun, 19 Jan 2020 12:10 PM IST
प्राची प्रियम लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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शबाना आजमी-फैज अहमद फैज - फोटो : Social Media
महाराष्ट्र के रायगढ़ में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर जावेद अख्तर और उनकी पत्नी अभिनेत्री शबाना आजमी की कार शनिवार को सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई। घटना में शबाना आजमी घायल हो गईं, जबकि जावेद अख्तर को ज्यादा चोटें नहीं आई हैं। शबाना की नाक और सिर में गंभीर चोट आई है। उन्हें पहले नवी मुंबई के एमजीएम अस्तपाल में भर्ती कराया गया है, जहां फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। आपको बता रहे हैं शबाना आजमी के साथ हुए एक छोटे से वाकये के बारे में जब उन्हें मशहूर शायर फैज अहमद फैज ने डांट लगाई थी। 
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Shabana Azmi - फोटो : Social Media
शायर और गीतकार जावेद अख्तर से निकाह के बाद शबाना उनके साथ जानकी कुटीर में रहती थीं। उस दौरान उनका घर बड़ा नहीं था, लेकिन वहां बड़ी-बड़ी हस्तियों का आना-जाना लगा रहता था। लेखन क्षेत्र से ताल्लुक होने के कारण उनके घर में फिराक गोरखपुरी, बेगम अख्तर, जोश मलीहाबादी जैसी शख्सियतों की महफिलें जमती रहती थी। मशहूर शायर फैज अहमद फैज भी जावेद और शबाना के यहां आते रहते थे। फैज से उनके घर जैसे रिश्ते थे। 
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shabana azmi - फोटो : अमर उजाला
एक समय जब शबाना मॉस्को में रह रही थीं, तो वहीं भी उनकी मुलाकात फैज अहमद फैज से हुई। शबाना उनसे मिलकर खुश थीं। इसी बीच फैज ने शबाना से कहा कि, 'एक नई नज्म लिखी है...पढ़ो तो जरा।' शबाना झेंप गईं, क्योंकि उन्हें उर्दू पढ़ना नहीं आता था। 

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अभिनेत्री शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला
जब शबाना ने यह बात फैज को बताई तो वो भड़क गए और शबाना को जोरदार डांट लगा दी। उन्होंने कहा कि कैसे नामाकूल मां-बाप हैं तुम्हारे, उर्दू पढ़ना नहीं सिखाया। हालांकि शबाना ने उन्हें बताया कि वह उर्दू समझती हैं, केवल उसकी लिपि उन्हें नहीं आती। लेकिन इन बातों का फैज अहमद फैज पर कोई असर नहीं पड़ा। 
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shabana azmi
यह सब चल ही रहा था कि शबाना ने गुस्साए फैज अहमद फैज को खुश करने के लिए बोल दिया कि वह उनकी बहुत बड़ी फैन हैं और उनके हजारों शेर पढ़े हैं। इसपर फैज अहमद फैज ने कहा कि जरा अपना पसंदीदा शेर सुनाना। शबाना ने तपाक से सुना दिया- 'दिल से उठता है कि जां से उठता है, ये धुआं सा कहां से उठता है।' मीर तकी मीर का यह शेर सुन फैज को समझ नहीं आया कि वो क्या कहें। 
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shabana azmi
शबाना फिर भी कहां मानने वाली थीं। इसे ढकने के लिए उन्होंने और भी बड़ी गलती कर दी और फैज का एक और शेर कहकर बहादुर शाह जफर का शेर सुना दिया। शबाना ने सुनाया- 'बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो ना थी।' इसके बाद तो फैज अहमद फैज जो तमतमाए उसे शबाना आज भी नहीं भूली हैं। अब भी कई बार इस किस्से का जिक्र करते हुए शबाना ठहाके लगाती हैं। 
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