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शिवांगी सिंह: भारतीय नौसेना में पहली महिला पायलट

Mon, 10 Feb 2020 06:43 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शिवांगी सिंह - फोटो : bbc
यूं तो महिलाएं दुनिया के हर क्षेत्र में ख़ुद को साबित कर रही हैं और अपनी क़ामयाबी के झंडे गाड़ रही हैं।लेकिन अभी भी बहुत सारे मोर्चे ऐसे हैं, जिनसे उन्हें दूर रखा गया है। कल तक नेवी में किसी महिला का पायलट होना एक दूर की कौड़ी थी लेकिन अब ये सच्चाई है और इसे साबित किया है बिहार के मुजफ्फरपुर की शिवांगी सिंह ने।

 
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शिवांगी सिंह - फोटो : bbc
सब-लेफ़्टिनेंट शिवांगी सिंह भारतीय नौसेना में पहली महिला पायलट बनी हैं। 2 दिसंबर 2019 को शिवांगी को अधिकारिक तौर पर नौसेना में पायलट के रूप में शामिल कर लिया गया।पहली बार पायलट बनने का कब सोचा?
इस सवाल पर शिवांगी कहती हैं, "मैं 10 साल की थी जब हमारे गाँव में एक नेता हेलिकॉप्टर से आए थे सब उन्हें देखने जा रहे थे मैं भी अपने नाना जी के साथ गई और तब मैंने हेलिकॉप्टर को उड़ते हुए देखा और सोचा कि मैं भी पायलट बनूँगी।" शिवांगी मुजफ्फरपुर से पढ़ी हैं। बचपन से ही शिवांगी आसमान में उड़ना चाहती थीं, लेकिन नौसेना के बारे में उन्हें बहुत कुछ नहीं पता था।


 
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शिवांगी सिंह - फोटो : bbc
शिवांगी बताती हैं, "जब फोर्थ ईयर में यूनिवर्सिटी एंट्री स्कीम के लिए नेवी आई थी, तो उनकी यूनिफार्म देखकर मैं बहुत ज्यादा अट्रैक्ट हो गईं। फिर मुझे पता लगा कि बतौर पायलट नेवी की वूमेन एंट्री शुरू हुई है। तभी मैंने सोच लिया कि मैं इस क्षेत्र में जाऊंगी।" उन्होंने बताया कि वह मणिपाल इंस्टिट्यूट से एमटेक की पढ़ाई करते हुए एसएसबी की परीक्षा दी लेकिन वो उसमें असफल रहीं।



 

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शिवांगी सिंह - फोटो : bbc
उन्होंने मालवीय नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एमटेक के कोर्स में दाखिला लिया और 2018 में एक बार फिर उन्होंने एसएसबी का एग्जाम दिया। जिसमें वो सफल रहीं। शिवांगी ने पिछले छह महीने कोच्चि में इंडियन नेवल एयर स्क्वॉड्रन 550 के साथ डोर्नियर 228 एयरक्राफ्ट को उड़ाना सीखा है।

 
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शिवांगी सिंह - फोटो : bbc
फिलहाल वो नौसेना में डोर्नियर 228 उड़ाएंगी, ये एयरक्राफ्ट नौसेना में पेट्रोलिंग के काम आता है। लेकिन नौसेना में महिलाओं को अब भी जहाज पर जाने की मनाही है। इस सवाल पर शिवांगी कहती हैं, "अभी भले ही महिलाएं नौसेना में जहाज पर नहीं जा सकतीं, लेकिन आने वाले समय में ये भी मौके आएंगे जिन्हें मैं हासिल करना चाहूंगी।" शिवांगी नौसेना में ट्रेनिंग के अनुभवों के बारे में बताती हैं, "जब हमारी सोलो स्टार्ट हुई यानी जब हमें जहाज अकेले ले जाना होता है, उस वक्त मुझे बहुत डर लगा कि पता नहीं मैं इसे अकेले ले जा पाऊंगी या नहीं। लेकिन टेक ऑफ करने के बाद सारा डर चला गया। वो एक अलग ही अनुभव होता है जब आप ऊपर से देखते हो पूरी दुनिया छोटी दिखती है।"

 
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- फोटो : ANI
अपनी आगे की योजना के बारे में बताते हुए शिवांगी ने कहा, "मेरा ये पूरा ऑपरेशनल खत्म हो जाए, फिर मैं P8I विमान उड़ाना चाहूंगी। ये एक बड़ा एयरक्राफ्ट है, इसकी रेंज ज्यादा है और यह ज्यादा समय के लिए उड़ सकता है।" अपनी इस उपलब्धि से खुश शिवांगी कहती हैं कि उन्होंने दूसरों के लिए एक मिसाल कायम की है।

 
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लेफ्टिनेंट शिवांगी - फोटो : PTI
उन्हें बहुत अच्छा लग रहा कि इससे और लड़कियां को भी इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा मिलेगी। शिवांगी की क़ामयाबी से उनके परिवार में बेहद खुशी का माहौल है। पिता हरि भूषण सिंह कहते हैं, "ऐसे तो खुशी होती ही है। लेकिन जब लोग कहते हैं कि आपकी बेटी ने बहुत अच्छा किया है तब और खुशी होती है। आज बेटी की वजह से ही मेरा नाम रोशन हुआ है।" 

 
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Navy Chief Admiral Karambir Singh - फोटो : ANI
1992 तक नौसेना में महिलाएं केवल स्वास्थ्य सेवाओं में प्रवेश पाती थीं। रक्षा मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार नौसेना में पायलट के 735 पदों में से 91 खाली हैं। भारत सरकार 'नारी शक्ति', 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियानों की बात तो करती है लेकिन रक्षा मंत्रालय के अनुसार नौसेना में महज 6.7 प्रतिशत महिला अफसर हैं।
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