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जानिए आईवीएफ तकनीक के बारे में, कैसे हासिल कर सकते हैं संतान सुख

Fri, 07 Feb 2020 02:39 PM IST
सारंग उपाध्याय लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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आईवीएफ - फोटो : सोशल मीडिया
बदलती लाइफ स्टाइल का असर प्रजनन क्षमता पर भी हुआ है। पोषणयुक्त खान-पान का अभाव, ठीक से नींद ना होना, काम का बोझ और लगातार बढ़ता तनाव प्रजनन से जुड़ी समस्याओं की भी एक बड़ी वजह है। प्रजनन की समस्या स्त्री या पुरुष दोनों को हो सकती है। प्रजनन से जुड़ी समस्या से न सिर्फ आपका दाम्पत्य जीवन प्रभावित होता है बल्कि आपका पारिवारिक व सामाजिक जीवन भी प्रभावित होता है। निःसंतान दम्पतियों को समाज में अलग दृष्टि से देखा जाता है। खासतौर से हमारे देश में महिलाएं अलग तरह का दुख उठाती हैं। 
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IVF - फोटो : IVF
निःसंतान दंपती अपने दुख को दूर करने के लिए कई तरह के अंधविश्वासों का भी शिकार होते हैं। अक्सर लोग अपना कीमती समय और लाखों रुपए इस समस्या से निजात पाने के लिए धार्मिक पाखंडियों के ऊपर खर्च कर देते हैं लेकिन समस्या का उपाय नहीं मिल पाता। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि संतान ना होने की समस्या का हल आज विज्ञान के पास उपलब्ध है। विज्ञान आजकल बांझपन व अन्य प्रजनन संबंधित दिक्कतों को नष्ट करने के क्षेत्र में तेजी से कार्यरत है। इसी का परिणाम है आईवीएफ तकनीक यानी की इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक। 
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सांकेतिक तस्वीर
दरअसल, आईवीएफ एक ऐसी तकनीक है जो उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई हैं जो मां नहीं बन पा रही है। यह तकनीक महिलाओं में गर्भाधान की सबसे अच्छी तकनीक मानी जाती है। इस तकनीक में किसी महिला के अंडाशय से अंडे या एग्स का पुरुष के शुक्राणुओं (स्पर्म) से किसी द्रव माध्यम (लिक्विड मीडियम) में सम्पर्क कराया जाता है।

 

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indian ivf
इस प्रक्रिया के बाद निषेचित (फर्टिलाइज) एग को महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है। इस प्रकार एग को फर्टिलाइज कराने में गर्भ-नलिकाओं, जिनके माध्यम से सामान्य रूप में एग्स व स्पर्म का सम्पर्क नहीं होता है, की जरूरत ही नहीं पड़ती और फर्टिलाइज एग महिला के गर्भाशय में पहुंच जाता है।
 
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ऐसे रखें अपने बच्चे का नाम - फोटो : Social Media
बता दें कि इस तकनीक का प्रयोग खासतौर पर तब करते हैं जब महिला की गर्भ नलिकाएं बंद होती है अथवा महिला में एग्स न बन रहे हों। पुरुष में शुक्राणुओं की संख्या कम होने पर भी इस तकनीक का प्रयोग करते हैं। परिवार में आनुवांशिक बीमारी होने पर बच्चे को इस बीमारी से बचाने के लिए भी आईवीएफ का प्रयोग किया जाता है। 
 
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सर्जरी विभाग में सर्जरी के बाद अब बेहतर है नवजात - फोटो : अमर उजाला
आईवीएफ तकनीक संतान प्राप्त करने के लिए एक आसान और सुरक्षित तरीका है। लेकिन इसमें कुछ सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं। यदि आप आईवीएफ तकनीक का प्रयोग करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो बेहतर होगा किसी जानकार की सलाह लें और विश्वसनीय व अनुभवी आईवीएफ संस्थान की मदद लें। 
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ऐसे रखें अपने बच्चे का नाम - फोटो : Social Media
आपको बता दें कि आईवीएफ के नि:संतानता विशेषज्ञों के परामर्श व उचित इलाज के साथ अब जटिल से जटिल अवस्थाओं में भी मां बनना संभव है। आप चाहें तो इस संबंध विशेषज्ञों से जानकारी हासिल कर सकते हैं। 
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