महिला दिवस 2022
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एसएस मौसमी- अंधविश्वास और मिथकों का भंडाफोड़
अंधविश्वास और मिथकों का भंडाफोड़ करने वाली 30 साल की एसएस मौसमी पश्चिम बंगाल में एक चेंजमेकर के तौर पर उभरीं। बंगाल के हल्दिया स्थित चावलापुर गांव से जन्मी मौसमी एक रूढ़िवादी संयुक्त परिवार से ताल्लुक रखती है। चार साल के बच्चे की मां होने के नाते, मौसमी की अपने समुदाय के लिए कुछ करने की ललक थी। वह घर पर खुद को व्यस्त रखती थीं और सही खान-पान, व्यक्तिगत स्वच्छता और बच्चों की देखभाल के तरीकों को अपनाने के बारे में बहुत जिज्ञासा रखती थीं। परिवार के सदस्यों का अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखना आदि पर उनका फोकस रहता लेकिन समाज को लेकर भी उनकी चिंता वैसी ही थी। वह कई गर्भवती महिलाओं को अंधविश्वास का शिकार होते देख चुकी थीं। सदियों पुरानी मान्यताओं के कारण, गर्भवती महिलाओं को डेयरी, कुछ फल, सब्जियां, तेल का सेवन करने से मना किया जाता था। वहीं महिलाओं को संस्थागत प्रसव और टीकाकरण का विकल्प चुनने के लिए राजी करना भी मुश्किल होता है। लेकिन सुपोषण संगिनी बनकर मौसमी ने महिलाओं के ज्ञान की खाई को पाटने के लिए कार्य करना शुरु किया। प्रसवपूर्व देखभाल पंजीकरण, कुपोषित बच्चों के केसलाइड (13 एसएएम और 21 एमएएम), आईएफए टैबलेट की खपत के प्रति अनिच्छा आदि मामलों में संघर्ष करने लगीं। मौसमी रोजाना 10-12 घरों में जाती है और पुरुषों को भी फैमिली काउंसलिंग में शामिल करती। इससे महिलाओं की क्षमताओं और व्यवहार में बदलाव की प्रवृत्ति का निर्माण होता। उनकी मेहनत का परिणाम है कि वीएचएसएनडी के डाटा स्रोत के अनुसार, अब गांव में 125 बच्चों में से गर्भावस्था पंजीकरण 100%, 0% गंभीर तीव्र कुपोषित बच्चे और केवल 4% मध्यम तीव्र कुपोषित बच्चे हैं।