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पढ़ाई में आने वाली दुश्वारियों को पार कर बन गईं देश की पहली महिला बाल चिकित्सक डॉ. सरोज

Mon, 13 Jan 2020 10:46 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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saroj chudamani gopal
महिलाएं अपनी लगन और मेहनत के बल पर आसमान छूने की ताकत रखती हैं। ऐसी ही अनमोल कहानी है डॉक्टर सरोज की, जिन्होंने देश की सर्वोच्च उपाधि 'एमसीएच' हासिल की और बनीं देश की पहली महिला बाल चिकित्सक। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की पहली महिला कुलपति, आगरा मेडिकल कॉलेज की पहली छात्रा हैं डॉक्टर सरोज जिन्होंने जनरल सर्जरी में पढ़ाई की। तो चलिए जानें पद्मश्री से सम्मानित प्रो. सरोज चूड़ामणि गोपाल की संघर्ष गाथा। 
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saroj chudamani gopal - फोटो : amar ujala
प्रो. सरोज चूड़ामणि का मथुरा के एक गांव में जन्म 1944 में हुआ था। उन्होंने बताया कि उनके पिता प्लाटून कमांडर थें, जन्म के समय प्रो. सरोज के ताऊ जी ने उनके पिता को पत्र लिख कर बताया कि मुझे बताते हुए दुख हो रहा है कि तुम्हारे ऊपर शिला(बोझ रूपी पत्थर) आ गई। इसके बाद प्रो. सरोज के पिता ने भगवान की पूजा की और कहा कि मैं अपनी बेटी का स्वागत करता हूं।


 
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saroj chudamani gopal
पहले तो उस दौर में किसी लड़की का मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का निर्णय, वह भी जनरल सर्जरी के क्षेत्र में। दूसरे, लड़कों के बीच अकेली छात्रा। प्रो. गोपाल बताती हैं कि डॉक्टर बनने का जुनून इस कदर था कि एमबीबीएस में एडमिशन के लिए पांच दिनों तक खाना-पीना छोड़ दिया।

 

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saroj chudamani gopal - फोटो : amar ujala
फिर आगरा के मेडिकल कॉलेज में जनरल सर्जरी में दाखिला तो ले लिया लेकिन लड़कों के बीच अकेली लड़की होने की वजह से परेशानियां कदम-कदम पर थीं। लड़की होकर जनरल सर्जरी लेने पर प्रोफेसरों ने भी असहयोग ही किया लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपने अधिकार को पाने के लिए उन्होंने कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाना पड़ा। इसके बाद जब वे सर्जन बन गई तब उनके पति डा. सिद्ध गोपाल ने भी उनका बहुत साथ निभाया।

 
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saroj chudamani gopal - फोटो : amar ujala
75 साल की उम्र की प्रो. गोपाल आज भी बतौर डिस्टिंग्विस्ड प्रोफेसर बीएचयू के मेडिकल छात्रों को पढ़ाती हैं और जोश-कर्मठता ऐसी कि आधे उम्र के लोग भी मात खा जाएं। प्रो. चूड़ामणि के उपलब्धियों भरे इस सफर के पीछे संघर्षों की लंबी दास्तान है। ये सफर उनके लिए कतई आसान नहीं था।
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