सांकेतिक तस्वीर
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बेटे ने बढ़ाया मनोबल
ऐसे मानसिक उथल-पुथल के हालात में, मैंने एक बार अपने बेटे को कॉल किया। मैंने उसे बताया कि वह हमारे यहां किसी भी कीमत पर न आए। साथ ही मैंने उसे बताया कि उसके पिता भी उससे मिलने नहीं आ पाएंगे। चूंकि ट्रैवल करने के सभी विकल्प बंद हो गए थे, ऐसे में मेरे पति हर सुबह मुझे हॉस्पिटल छोड़ने जाते थे और उसके बाद वह अपने दफ्तर जाते थे। यह सब समझते हुए मेरे बेटे ने इससे निबटने के लिए मानसिक मजबूती का परिचय दिया। उसने मेरा मनोबल बढ़ाते हुए कहा, 'ममा, कोई बात नहीं। आप यहां मत आइएगा। मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी।' लेकिन, मैं रो रही थी… मेरे बेटे ने कहा, 'ममा, आपको रोना नहीं चाहिए।'
पंद्रह मिनट में वह दरवाजे पर खड़ा था। उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे बिठाया। उसने कहा, 'मम्मी आपको रोना नहीं है। आप एक बड़ा काम कर रही हैं। पापा, नानी, नाना, चाचा हम सबको आप पर गर्व है। मेरे दोस्त भी इस बात पर गर्व करते हैं कि आप एक नर्स हैं। आपको रोना नहीं चाहिए। मैं भरोसा करता हूं कि आप यह काम कर सकती हैं।' मेरा 15 साल का बेटा मुझसे भी बड़ा हो गया था और वह मुझे दिलासा दे रहा था।