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'खुले में शौच न करने की पहल' को किया जीवन समर्पित, अब राष्ट्रपति ने किया नारी शक्ति से सम्मानित

Tue, 10 Mar 2020 06:37 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Amar Ujala
नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के शुरू करने के पहले से ये लोगों के अंदर स्वच्छता की अलख जगा रही हैं। अपने आसपास के लोगों को खुले में शौच न करने की सीख देने वाली कलावती राजमिस्त्री का काम करती हैं। अपने काम के कारण ही वो स्वच्छता वीरांगना के नाम से जानी जाती हैं। चलिए जानें 32 सालों से स्वच्छता अभियान चलाने वाली महिला राजमिस्त्री कलावती के बारे में.....


 
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- फोटो : ANI
कलावती को आत्म निर्भर बनने की प्रेरणा उनके पति जयराज सिंह से मिली। पति भी राजमिस्त्री थे। उनके निधन के बाद कलावती ने अपना पूरा जीवन खुले में शौचालय अभियान को दे दिया। रविवार को जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें दिल्ली में नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया तो फिर से उनके संघर्ष की कहानी लोगों के सामने आ गई। आज से करीब 42 साल पहले कलावती सीतापुर से अपने पति के साथ कानपुर आई थीं।

 
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कलावती देवी - फोटो : Social Media
जेके मंदिर के पीछे राजापुरवा में रहते हुए वह भी अपने पति के साथ भवन निर्माण में मजदूरी करने लगी। इसी दौरान उन्होंने पति का हाथ बंटाने के लिए राजमिस्त्री के रूप में काम करना शुरू किया। कुछ समय बाद वह श्रमिकों के कल्याण के लिए गठित संस्था श्रमिक भारती से जुड़ गईं। इसके बाद कलावती ने पीछे नहीं देखा। वह अपने साथ और भी महिलाओं को जोड़कर पूरा कुनबा तैयार कर लिया।


 

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कलावती - फोटो : Social Media
कलावती यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से भी पहले से ही श्रमिक भारती के जरिए चला रही थीं। मोदी की मुहिम ने उन्हें और ताकत दी। जिसका परिणाम आज सभी के सामने है। सबसे पहले उन्होेंने करीब तीन लाख की लागत से एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया था। अब तक वह 40 हजार से अधिक शौचालयों का निर्माण कर चुकी है। 


 
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कलावती - फोटो : Social Media
कलावती ने जेके मंदिर के समीप स्थित राजापुरवा बस्ती से शौचालय निर्माण अभियान की शुरुआत किया। इसके साथ ही राखी मंडी, जूही, समेत कई जगह सामुदायिक और एकल शौचालय बनवाकर लोगों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाई। शहरी बस्तियों के बाद उन्होंने गांवों में भी इस मुहिम को चलाया।
पति की मौत के बाद वह वर्ष 2015 से अपनी बेटी और दामाद के साथ शिवराजपुर स्थित कुंवरपुर गांव में रह रही हैं। श्रमिक भारती के अमिताभ ने बताया कि कलावती में अपने काम के प्रति लगन थी, जिसकी वजह से वह इस मुकाम पर पहुंची।
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