दरगाह
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स्थानीय निवासियों के अनुसार, दरगाह का निर्माण लगभग 500 वर्ष पहले कबीर शाह ने स्वयं करवाया था और इसके पत्थरों को उनके निर्देशन में तराशा गया। मुन्ने शाह, जो कई पीढ़ियों से इस दरगाह की देखरेख कर रहे हैं, बताते हैं कि यह दरगाह राजाशाही काल में कौड़ियों के दौर में बनी थी, जब मजदूरी के रूप में कौड़ियां दी जाती थीं।