मंदिर में मंदोदरी की मूर्ति
- फोटो : Social Media
श्राद्ध पक्ष में रावण का करते हैं तर्पण
मान्यता है कि जब रावण विवाह करने जोधपुर के मंडोर आए, तब श्रीमाली ब्राह्मण उनके साथ बारात में आए थे। विवाह के बाद मंदोदरी के साथ रावण लंका चले गए लेकिन श्रीमाली ब्राह्माण यहीं रह गए। तभी से गोधा गोत्र के श्रीमाली ब्राह्मण रावण की विशेष पूजा करते आ रहे हैं। ये रावण दहन के दिन शोक मनाते हैं। यहां तक कि गोधा गोत्र के ब्रह्माण श्राद्ध पक्ष में दशमी पर रावण का श्राद्ध, तर्पण आदि भी करते हैं। अपनों के निधन के बाद जिस तरह स्नान कर यज्ञोपवीत बदला जाता है, दशहरे पर रावण दहन के बाद इस समाज के लोग स्नान कर यज्ञोपवीत बदलते हैं।