फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हनुमान जयंती 2026: मेहंदीपुर बालाजी धाम में लगती है ‘भूत-प्रेतों की कचहरी’, अर्जी के बाद सुनाया जाता है फैसला

Thu, 02 Apr 2026 06:00 AM IST
दौसा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

Hanuman Jayanti 2026: दौसा के मेहंदीपुर बालाजी धाम में भूत-प्रेतों की कचहरी लगने की मान्यता है, जहां अर्जी और पेशी के जरिए बाधा दूर करने की प्रक्रिया होती है। आस्था, रहस्य और अनोखी परंपराओं का यह केंद्र हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
विज्ञापन
1 of 8
हनुमान जयंती के मौके पर मेहंदीपुर बालाजी धाम - फोटो : अमर उजाला
दौसा जिले के मेहंदीपुर बालाजी धाम में हर दिन एक ऐसा दृश्य देखने को मिलता है, जो किसी भी सामान्य व्यक्ति को सिहरा दे। हजारों की भीड़ के बीच कोई दीवारों पर सिर पटकता है, कोई बाल खींचता है, कोई चीखता-चिल्लाता है तो कोई बेसुध होकर सड़कों पर भागता नजर आता है। यह सब यहां की उस मान्यता से जुड़ा है, जहां भूत-प्रेतों की कचहरी लगती है और फैसला स्वयं बालाजी महाराज सुनाते हैं।
 
विज्ञापन

2 of 8
हनुमान जयंती के मौके पर मेहंदीपुर बालाजी धाम - फोटो : अमर उजाला
भूत-प्रेत उतारने की मान्यता और ‘पेशी’ की प्रक्रिया
जयपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित इस धाम में लोगों का विश्वास है कि यहां आने से पहले ही व्यक्ति के भीतर मौजूद प्रेत सक्रिय हो जाता है। मंदिर में अर्जी लगाने के बाद ‘पेशी’ होती है, जहां प्रेत को सामने आना पड़ता है। कई बार जिद्दी प्रेत वाले लोगों को पकड़कर लाना पड़ता है, क्योंकि उनमें असामान्य ताकत आ जाती है। लेकिन जैसे ही वे बालाजी महाराज की चौखट पार करते हैं, उनके शांत होने की बात कही जाती है।
 
विज्ञापन

3 of 8
हनुमान जयंती के मौके पर मेहंदीपुर बालाजी धाम - फोटो : अमर उजाला
मंदिर परिसर का दृश्य और श्रद्धालुओं की आस्था
सुबह के समय मंदिर खचाखच भरा रहता है। लोग दूर-दूर से जल लेने आते हैं, जिसे नकारात्मक शक्तियों से बचाने वाला माना जाता है। मंदिर के बाहर और अंदर कई श्रद्धालु असामान्य व्यवहार करते दिखाई देते हैं, जिन्हें वहां मौजूद लोग प्रेत बाधा का असर मानते हैं। वहीं, उनके परिजन तालियां बजाकर और जयकारे लगाकर उनका साथ देते हैं।
 

4 of 8
हनुमान जयंती के मौके पर मेहंदीपुर बालाजी धाम - फोटो : अमर उजाला
तीन प्रमुख देव स्थल और ‘तीन पहाड़’ की मान्यता
मेहंदीपुर बालाजी धाम में तीन प्रमुख देवों बालाजी महाराज, प्रेतराज और भैरो बाबा की पूजा होती है। बालाजी का मंदिर तलहटी में स्थित है, जबकि प्रेतराज और भैरो बाबा का स्थान पहाड़ों पर है, जिसे ‘तीन पहाड़’ कहा जाता है। यहां पंचमुखी हनुमान मंदिर, 12 शिवलिंग, मां मनसा देवी, पितांबरी माता और अंजनी माता सहित कई देवस्थल मौजूद हैं। महंत के अनुसार, कई प्रतिमाएं स्वयंभू हैं और उनके प्रकट होने का इतिहास अज्ञात है।
 
विज्ञापन

5 of 8
हनुमान जयंती के मौके पर मेहंदीपुर बालाजी धाम - फोटो : अमर उजाला
रहस्यमयी पहाड़ और प्राचीन मान्यताएं
तीन पहाड़ क्षेत्र में एक प्राचीन नीम का पेड़ है, जिसे काटने की हर कोशिश असफल बताई जाती है। वहीं, यहां ताले बांधने की परंपरा भी है, जिसमें माना जाता है कि प्रेत को ताले में कैद कर दिया जाता है। मंदिर परिसर में चाबुक भी रखा जाता है, जिसे पहले जिद्दी प्रेत को काबू करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, हालांकि अब इस परंपरा को बंद बताया जाता है।
 
विज्ञापन

6 of 8
हनुमान जयंती के मौके पर मेहंदीपुर बालाजी धाम - फोटो : अमर उजाला
भैरो बाबा को चढ़ाई जाती है शराब और सिगरेट
मंदिर के एक हिस्से में स्थित श्री महाकाल भैरो मंदिर में प्रेत बाधा दूर करने की प्रक्रिया के दौरान शराब और सिगरेट चढ़ाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे भैरो बाबा प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा नारियल, नींबू और सफेद धागे का उपयोग कर विशेष विधियों से ‘बंधन काटने’ की प्रक्रिया की जाती है।

पढ़ें- 'नौकरी-मुआवजा बाद में, पहले मौत का बदला मौत': रिटायर्ड फौजी की हत्या पर छलका बेटी का दर्द, देखें वीडियो
 
विज्ञापन

7 of 8
हनुमान जयंती के मौके पर मेहंदीपुर बालाजी धाम - फोटो : अमर उजाला
शाम की आरती और ‘भूतों का बाजार’
शाम होते ही यहां का माहौल और भी अलग हो जाता है। आरती के समय मंदिर के बाहर भारी भीड़ जमा हो जाती है। लाउडस्पीकर पर भजन, बच्चों की आवाजें और जयकारों के बीच कई लोग प्रेत बाधा के लक्षणों के साथ दिखाई देते हैं। आसपास का बाजार भी गुलजार रहता है, जहां शुद्ध शाकाहारी और बिना लहसुन-प्याज का भोजन उपलब्ध होता है।
 
विज्ञापन

8 of 8
हनुमान जयंती के मौके पर मेहंदीपुर बालाजी धाम - फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालुओं के अनुभव और नियम
यहां आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि प्रेत बाधा का निवारण बिना किसी शुल्क के होता है, लेकिन रहने और खाने का खर्च स्वयं उठाना पड़ता है। साथ ही, यहां आने से पहले और बाद में 21 दिनों तक कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करने जैसे नियम भी अपनाए जाते हैं।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें