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पुष्कर मेला 2025 का आगाज: रेत के धोरों में गुंजी ऊंट और घोड़ों की रुणझुण, सजे बाजार; उमड़े देशी-विदेशी सैलानी

Wed, 22 Oct 2025 08:38 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर/पुष्कर

सार

Rajasthan Pushkar Fair 2025: पुष्कर मेला 2025 बुधवार से शुरू हुआ। 207 पशु, देसी-विदेशी पर्यटक और सज-संवर बाजारों ने मेले को जीवंत बनाया। धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों ने इसे आस्था, परंपरा और रौनक का प्रतीक बना दिया।
 
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पुष्कर मेला 2025 का आगाज - फोटो : अमर उजाला
विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला 2025 का आगाज आज बुधवार से हो गया है। रेतीले धोरों में ऊंटों की रुणझुण और घोड़ों की टापों के साथ एक बार फिर मरुस्थल में परंपरा, संस्कृति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। पशुपालन विभाग की ओर से पशु मेला कार्यालय स्थापित कर दिया गया है। यह मेला आगामी 6 नवंबर तक चलेगा। मेले में पशुओं की लगातार आवक जारी है, वहीं देसी-विदेशी पर्यटकों का आना भी शुरू हो गया है।
 
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ऊंटों ने भी डाला डेरा - फोटो : अमर उजाला
मेले में अब तक 207 पशु पहुंच चुके हैं, जिनमें 196 ऊंट, 10 घोड़े और एक बैल शामिल हैं। पशु मेला प्रभारी डॉ. सुनील घिया के अनुसार पशुपालक ऊंटों और घोड़ों के साथ डेरा डाल चुके हैं। घोड़ा पालक अपने घोड़ों के लिए अस्थायी और स्थायी अस्तबल तैयार कर रहे हैं। इस बार भी मेला तीन चरणों में आयोजित होगा- पशु मेला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक मेला।
 
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पशु मेले में आराम फरमाता ऊंट - फोटो : अमर उजाला
पुष्कर मेला मैदान और उसके आसपास के क्षेत्र में दुकानें सज चुकी हैं। हस्तशिल्प, पारंपरिक आभूषण, कपड़े और ऊंट-सामग्री बेचने वाले व्यापारी बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। वहीं, विदेशी सैलानियों की आवाजाही ने मेले में रौनक बढ़ा दी है। अजय रावत द्वारा रेत पर बनाई गई आकर्षक कलाकृतियां भी पर्यटकों का ध्यान खींच रही हैं।
 

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पशु मेला: ऊंटों का आगमन - फोटो : अमर उजाला
सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। 2 हजार से अधिक पुलिसकर्मी मेले में सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे। भीड़भाड़ वाले इलाकों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई है ताकि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों को किसी तरह की असुविधा न हो। हालांकि मेला शुरू होने के बावजूद मैदान की चारदीवारी की पुताई अब तक नहीं की जा सकी है, जिस पर अभी भी ‘पुष्कर मेला 2024’ लिखा हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही पुताई कर इसे अपडेट किया जाएगा।

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घोड़ों के लिए बनाए गए अस्तबल - फोटो : अमर उजाला
पुष्कर के बाजारों, सरोवर के घाटों और ब्रह्मा मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। दीपावली के बाद से ही पुष्कर का माहौल धार्मिक उत्सव में बदल गया है। मेले का विधिवत शुभारंभ 30 अक्तूबर को ध्वजारोहण के साथ किया जाएगा, जिसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रतियोगिताओं की शुरुआत होगी।
 
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पशु मेला: घोड़े और बैल का आगमन - फोटो : अमर उजाला
पुष्कर मेला न केवल व्यापार और पशु खरीद-फरोख्त का केंद्र है, बल्कि यह राजस्थान की लोकसंस्कृति, कला, संगीत और परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन भी है। देश-विदेश से आए सैलानी यहां ऊंट नृत्य, लोकनृत्य और राजस्थान की रंग-बिरंगी झलकियों का आनंद लेने पहुंचे हैं। इस तरह पुष्कर एक बार फिर रंग, रौनक और आस्था से सराबोर हो गया है।

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