बारिश के दौरान भी किसानों की लंगर सेवा पूरी तरह जारी रही। तिरपाल के नीचे चाय का लंगर तैयार किया जाता रहा और किसानों को गर्म चाय पिलाई गई। वहीं, कुछ किसान बारिश का आनंद लेते भी नजर आए।
मोहाली में किसान आंदोलन के चौथे दिन शुक्रवार को तेज बारिश के बावजूद किसान मोर्चे पर डटे रहे। बारिश से बचने के लिए किसान अपने साथ तिरपाल लेकर पहुंचे हैं। धरनास्थल पर खड़ी ट्रॉलियों को भी तिरपाल से इस तरह ढका गया है कि वे किसी कमरे से कम नहीं लगतीं। कई ट्रॉलियों पर पंखे लगाए गए हैं।
बारिश के दौरान भी किसानों की लंगर सेवा पूरी तरह जारी रही। तिरपाल के नीचे चाय का लंगर तैयार किया जाता रहा और किसानों को गर्म चाय पिलाई गई। वहीं, कुछ किसान बारिश का आनंद लेते भी नजर आए। धरनास्थल पर किसी अनहोनी की स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस भी मौजूद रही।
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मोहाली में बरसात
- फोटो : संवाद
सरकार हमारा सब्र देखना चाहती है तो देख ले: लोंगोवाल
भारतीय किसान यूनियन एकता (आजाद) के नेता जसविंदर सिंह लोंगोवाल ने कहा कि सरकार शायद किसानों का सब्र देखना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मांगें करीब एक महीने पहले ही सरकार को लिखित रूप में दे चुके हैं। पिछले दिनों भी मांग पत्र सरकार को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगें न तो बहुत आसान हैं और न ही ऐसी हैं जिन्हें पूरा करना असंभव हो।
लोंगोवाल ने कहा कि सरकार जितना आंदोलन को लंबा खींचेगी, उसे उतना ही राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा। चुनाव नजदीक हैं और अगर सरकार ने किसानों की मांगों पर सही फैसला नहीं लिया तो लोग सरकार का पासा पलट सकते हैं।
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विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर पुराने समझौते रद्द करने की मांग
लोंगोवाल ने कहा कि किसानों की प्रमुख मांगों में पंजाब विधानसभा का सत्र बुलाकर पुराने समझौतों को रद्द करना शामिल है। उन्होंने 78, 79 और 80 धाराओं को रद्द करने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि इन फैसलों के लिए सरकार को कोई बड़ा वित्तीय खर्च नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने वन टाइम सेटलमेंट योजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे सरकार को करीब 4,000 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही आवारा पशुओं और आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए भी ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।
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मोहाली में बरसात
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एमएसपी, एग्रो इंडस्ट्री और बाढ़ राहत भी प्रमुख मुद्दे
लोंगोवाल ने कहा कि किसानों की मांगों में फसलों पर एमएसपी से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आलू और अन्य फसलों के लिए किसानों को उचित बाजार और प्रसंस्करण की सुविधा नहीं मिल रही। पंजाब में एग्रो इंडस्ट्री लगाने की मांग भी लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इस दिशा में सरकारों ने ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने नहरों की डी-सिल्टिंग, पानी के रिचार्जिंग प्वाइंट बनाने, पंजाब के बांधों की डी-सिल्टिंग और दरियाओं के किनारों को मजबूत करने की मांग भी उठाई। उनका आरोप है कि बाढ़ से हुए नुकसान का उचित मुआवजा भी किसानों को नहीं मिला।
बोले- सरकार चाहे तो बैठाए, चाहे तो हम चलने को तैयार
लोंगोवाल ने कहा कि सरकार को किसानों की मांगों पर फैसला करना ही पड़ेगा। आज नहीं तो कल सरकार को नतीजा निकालना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को अगर सरकार आंदोलन स्थल पर बैठाना चाहती है तो वे बैठने को तैयार हैं और अगर बातचीत के बाद उन्हें वापस भेजना चाहती है तो वे उसके लिए भी तैयार हैं। लेकिन मांगों का समाधान किए बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा।