लोहड़ी पर लाहौर में दुल्ला भट्टी की मजार पर दी श्रद्धांजलि
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लोहड़ी पर लाहौर में दुल्ला भट्टी की मजार पर दी श्रद्धांजलि
लोहड़ी पर भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल ने ऐतिहासिक मियां साहिब कब्रिस्तान, लाहौर में महान क्रांतिकारी और लोकनायक दुल्ला भट्टी की मजार पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व फाउंडेशन के चेयरमैन इम्तियाज रशीद कुरैशी ने किया। इस दौरान सीनियर वाइस चेयरमैन मलिकत और इहतिशाम-उल-हसन भी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने दुल्ला भट्टी के उच्च दर्जे के लिए दुआ की और उनके साहस, मानवता तथा अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष को नमन किया।
इम्तियाज रशीद कुरैशी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि दुल्ला भट्टी केवल इतिहास का पात्र नहीं, बल्कि प्रतिरोध, सम्मान और शोषितों की रक्षा का जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय मुगल सत्ता अहंकार और क्रूरता में डूबी हुई थी, उस दौर में दुल्ला भट्टी ने अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। जब चुप रहना ही जीवन रक्षा माना जाता था, तब दुल्ला भट्टी अन्याय के विरुद्ध दीवार बनकर खड़े रहे।
कुरैशी ने कहा कि दुल्ला भट्टी आज भी लोगों की सामूहिक चेतना में जीवित हैं, इसी कारण लोहड़ी पर्व उनकी स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि दुल्ला भट्टी का तथाकथित अपराध यह था कि उन्होंने एक असहाय हिंदू युवती को मुगल शासक के चंगुल से बचाया और बाद में उसका विवाह कराकर मानवीय गरिमा और अंतरधार्मिक सद्भाव का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी मानवतावादी कार्य के कारण उन्हें दिल्ली के दरवाजों के बाहर सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई।
चेयरमैन ने चिंता जताई कि आज दुल्ला भट्टी की मजार खुद उपेक्षा और अन्याय का शिकार है। आरोप है कि कब्रिस्तान प्रशासन की मिलीभगत से मजार के आसपास अवैध कब्रें बनाई गई हैं और नशा तस्करों ने इस ऐतिहासिक स्थल को अपना अड्डा बना लिया है। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों की चुप्पी को शर्मनाक बताया।
इम्तियाज रशीद कुरैशी ने पाकिस्तान सरकार से मांग की कि दुल्ला भट्टी का भव्य मकबरा बनाया जाए, अवैध कब्जे हटाए जाएं, नशा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, उन्हें पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए और राष्ट्रीय नायक का दर्जा दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो फाउंडेशन राष्ट्रीय स्तर पर शांतिपूर्ण जन आंदोलन शुरू करेगा।