चंडीगढ़ सेक्टर-11 के श्री कुमार केमिस्ट के कैशियर जानकी दास की 13 जून को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या में जिगाना पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था।
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जानकी दास हत्याकांड में बड़ा खुलासा
- फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ सेक्टर-11 के श्री कुमार केमिस्ट के कैशियर जानकी दास की हत्या में जिगाना पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात में इस्तेमाल की गई तुर्किये निर्मित जिगाना पिस्टल आरोपियों को दिल्ली में उपलब्ध कराई गई थी। इस खुलासे के बाद जांच अब केवल शूटरों तक सीमित नहीं रही बल्कि अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क तक पहुंच गई है।
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कैशियर पर गोली चलाते आरोपी
- फोटो : संवाद
चंडीगढ़ पुलिस के एसएसपी सुमेर प्रताप सिंह के अनुसार प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जिगाना पिस्टल के पार्ट्स अवैध चैनलों के जरिए भारत लाए जाते हैं। इन्हें अलग-अलग हिस्सों में नेपाल रूट के माध्यम से देश में पहुंचाया जाता है और बाद में दिल्ली समेत कुछ अन्य स्थानों पर असेंबल कर तैयार हथियार के रूप में सप्लाई किया जाता है। इसके बाद ये हथियार पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और अन्य राज्यों में सक्रिय गैंगस्टरों तथा शूटरों तक पहुंचाए जाते हैं।
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एक अन्य शाॅप में घुसे आरोपी
- फोटो : संवाद/फाइल
12 से 13 लाख रुपये है कीमत
जांच एजेंसियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिगाना पिस्टल की कीमत करीब पांच से छह लाख रुपये होती है लेकिन भारत के अवैध नेटवर्क में पहुंचने के बाद इसकी कीमत 12 से 13 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। अत्याधुनिक तकनीक और ऑटोमैटिक फायरिंग क्षमता के कारण यह हथियार अपराध जगत में तेजी से लोकप्रिय हुआ है।
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सिद्धू मूसेवाला
- फोटो : संवाद
हाई-प्रोफाइल हत्याओं में हो चुकी है इस्तेमाल
जिगाना पिस्टल पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तब आई थी जब 29 मई 2022 को पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में इसका इस्तेमाल हुआ था।
इसके बाद गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद की हत्या और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में भी इसी हथियार का नाम सामने आया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक लगातार हाई-प्रोफाइल अपराधों में इस्तेमाल होने के कारण यह हथियार गैंगस्टरों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
क्यों पसंद करते हैं शूटर
विशेषज्ञों के अनुसार जिगाना पिस्टल में तकनीकी खराबी की संभावना बेहद कम होती है। इसमें लगातार कई राउंड फायर किए जा सकते हैं और रिकॉइल कम होने से निशाना अधिक सटीक रहता है। इसके स्टैंडर्ड मैगजीन में 15 राउंड और एडवांस मैगजीन में 17 राउंड तक गोलियां रखी जा सकती हैं। यही वजह है कि संगठित अपराध और सुपारी किलिंग में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।