क्रिकेट में पिता-पुत्र की ऐसी कई कमाल की जोड़ियां हैं जिन्होंने मैदान पर धमाल मचाएं हैं। इसी हफ्ते पिता-पुत्र की एक और जोड़ी ने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया है। पिता-पुत्र की जोड़ियों ने टेस्ट में कई दिलचस्प कारनामे भी किए हैं। उन्हीं बेहद शानदार कारनामों में 7 अनसुने रिकॉर्ड आपको बताने जा रहे हैं।
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टेस्ट क्रिकेट में पिता-पुत्र की 7 जोड़ियां जिन्होंने रचे 'दुर्लभ' कारनामे
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पिता-पुत्र की जोड़ियों के कारनामे की बात शुरू करें, इससे पहले आपको बता दें कि इसी हफ्ते दक्षिण अफ्रीका की टीम में एक कुक परिवार की एंट्री हुई जिसमें पिता जिमी कुक (1991-92) अपने टेस्ट करियर की पहली ही गेंद पर 0 पर आउट हो गए थे जबकि उनके बेटे स्टीफन कुक ने पहली ही गेंद पर चौका लगाने के साथ ही न सिर्फ खाता खोला बल्कि शतक भी ठोंक दिया।
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अब बात करते हैं, टेस्ट में पिता-पुत्र की जोड़ियों के कारनामे की। भारत के पहले टेस्ट कप्तान लाला अमरनाथ (फोटो) ने 1933-34 में तत्कालीन बंबई में इंग्लैंड के खिलाफ करियर की शुरुआत करते हुए पहले ही मैच में शतक ठोंक दिया। इसके बाद उनके बेटे सुरिंदर नाथ ने 1975-76 में ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने करियर का आगाज करते हुए शतक ठोंक दिया। सुरिंदर ने आज ही के दिन (25 जनवरी) 40 साल पहले शतक लगाया था।
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लाला अमरनाथ अपने पहले टेस्ट में शतक ठोंकने के बाद फिर कभी टेस्ट में शतक नहीं जमा सके तो वहीं उनके बेटे सुरिंदर भी अपने पहले मैच में लगाए टेस्ट शतक के बाद फिर कभी शतक नहीं लगा पाए। हालांकि लाला अमरनाथ के दूसरे बेटे मोहिंदर अमरनाथ (फोटो) को अपने पहले टेस्ट शतक के लिए 14 मैचों का इंतजार करना पड़ा लेकिन 8 साल के करियर में 11 शतक लगाने में सफल रहे।
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अब बात इंग्लैंड टीम में पिता-पुत्र की उस सफल जोड़ी की जिन्होंने टेस्ट में शतक जरूर लगाए हों। पिता क्रिस ब्रॉड ने करियर में 6 टेस्ट शतक लगाए जिसमें 4 तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही हैं। जबकि उनके बेटे स्टुअर्ट ब्रॉड जो मूल रूप से एक तेज गेंदबाज हैं ने भी शतक लगा रखे हैं। उन्होंने 2010 में लॉर्ड्स टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ 169 रनों की पारी खेली। साथ ही उन्होंने 300 से ज्यादा टेस्ट विकेट भी ले चुके हैं।
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पाकिस्तान क्रिकेट से भी पिता-पुत्र की एक जबर्दस्त सफल जोड़ी है जिन्होंने टेस्ट में दोहरा शतक लगाने का दुर्लभ कारनामा किया है। पिता हनीफ मोहम्मद ने करियर में 12 टेस्ट शतक लगाए हैं जिसमें विंडीज टीम (1957-58) के खिलाफ 337 रनों की पारी और 1964-65 में लाहौर में न्यूजीलैंड के खिलाफ नाबाद 203 रनों की पारी भी शामिल है। वहीं उनके बेटे शोएब मोहम्मद ने भी दोहरा शतक लगाने का कारनामा कर दिखाया।
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पाक के महानतम बल्लेबाज हनीफ मोहम्मद (फोटो) ने टेस्ट करियर में 2 बार दोहरा शतक जमाए हैं। जबकि उनके बेटे शोएब मोहम्मद ने भी टेस्ट करियर में 2 बार दोहरा शतक लगाया है। शोएब ने एक ही सत्र में 2 बार दोहरा शतक ठोंका। शोएब ने 1989-90 के में भारत के खिलाफ लाहौर टेस्ट में और फिर इसके बाद कराची टेस्ट में न्यूजीलैंड के खिलाफ दोहरा शतक लगाया। वह दोनों ही मौकों पर 203 रन बनाकर नाबाद भी रहे।
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अब बात न्यूजीलैंड से जहां हैडली परिवार से पिता-पुत्र की एक जोड़ी आई और दोनों ने टीम के लिए टेस्ट में शतक ठोंककर अनोखा रिकॉर्ड बना दिया। पापा वाल्टर हैडली दूसरे विश्व युद्ध से बाधित अपने करियर में महज 11 टेस्ट मैच खेल सके जिसमें 1946-47 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 116 रनों की शतकीय पारी खेली। इसके बाद उनके काबिल बेटे रिचर्ड हैडली (फोटो) ने भी टेस्ट में शतक जमा दिया।
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डैडी वाल्टर हैडली के 5 बेटे हुए जिसमें 3 क्रिकेटर बने लेकिन उनमें से सिर्फ एक ही टेस्ट खेलने का मौका हासिल कर सका। और इस क्रिकेटर का नाम है रिचर्ड हैडली (फोटो) जिन्होंने तेज गेंदबाजी में खूब नाम कमाया और 431 विकेट लेने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया जिसे बाद में कपिल देव ने तोड़ा। वह 2 बार 99 रन पर आउट हुए लेकिन 1986-87 में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ शतक (151 रन) ठोंक ही दिया।
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भारत की पटौदी परिवार से पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने अलग-अलग देशों के लिए टेस्ट में शतक लगाने का कारनामा किया है। इफ्तिकार ने सिडनी में इंग्लैंड के लिए अपने करियर की शुरुआत करते हुए 1932-33 में पहले ही मैच में शतक (102) लगा दिया था। बाद में वह भारतीय टीम के कप्तान बने लेकिन शतक नहीं लगा सके। जबकि उनके बेटे मंसूर अली खान पटौदी (फोटो) ने टीम इंडिया के लिए खेलते हुए टेस्ट में शतक लगाए।
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इंग्लैंड के लिए टेस्ट मैच खेलने के बाद इफ्तिकार पटौदी भारत के लिए खेलने लगे और कप्तान भी बन गए, लेकिन शतक उनके बल्ले से नहीं लगा। जबकि उनके बेटे मंसूर अली खान (फोटो) ने भारत के लिए खेलते हुए 6 शतक जमाए। 1963-64 में दिल्ली टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ मैच में चोट के कारण अपनी एक आंख गंवाने से पहले 203 रनों की पारी भी खेली।
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टेस्ट में कारनामा करने वाली पिता-पुत्र की छठी जोड़ी टीम इंडिया से ही है। विजय मांजरेकर ने अपने करियर में 55 टेस्ट खेले जिसमें 7 शतक लगाए और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा 189 रन (दिल्ली में इंग्लैंड के खिलाफ)। जबकि उनके बेटे संजय मांजरेकर जो बेहतरीन बल्लेबाज थे लेकिन ज्यादा टेस्ट नहीं खेल सके। उन्होंने 37 टेस्ट खेले जिसमें 4 शतक लगाए और उनकी सबसे बड़ी पारी रही 218 रनों (पाक, 1989-90) की।
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ऑस्ट्रेलिया से भी पिता-पुत्र की एक सफल जोड़ी है जिन्होंने कई कारनामे किए हैं। डैडी ज्यॉफ मार्श (1985-92) ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 50 टेस्ट मैच खेले जिसमें 4 शतक भी लगाए। अब उनके 2 बेटे शॉन मार्श और मिचेल मार्श कंगारू टीम का हिस्सा हैं। दोनों ही विस्फोटक बल्लेबाज भी हैं। पापा ज्यॉफ की तरह शॉन ने भी टेस्ट में शतक लगाए हैं जबकि मिचेल को अपने पहले टेस्ट का इंतजार है। शॉन ने पहले ही टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ शतक (141) लगाए थे।