ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर शेन वॉटसन ने रविवार दोपहर अचानक टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया। क्रिकेट के इस फॉर्मेट में उन्होंने 4 शतक और 24 अर्धशतक जमाएं। बल्लेबाजी में उनका औसत 35.19 और गेंदबाजी में 33 रहा। जाने, टेस्ट में उनकी पांच अद्भुत पारियां....
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जब टीम इंडिया के लिए सबसे बड़े सिरदर्द बन गए थे शेन वॉटसन
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दो साल पहले इंग्लैंड की धरती में हुए एशेज के पांचवें और अंतिम मुकाबले में शेन वॉटसन नंबर 3 पर बल्लेबाजी करने उतरे थे। ऑस्ट्रेलिया ए के मौजूदा कप्तान उस्मान ख्वाजा की जगह उन्हें टीम में जगह दी गई और उन्होंने खुद को साबित किया। वॉटसन ने 25 चौके और एक छक्के की मदद से 176 रन ठोके। वह भी उस वक्त पर जब टीम 11 रन पर अपना ओपनर बल्लेबाज गंवा चुकी थी।
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जब टीम इंडिया के लिए सबसे बड़े सिरदर्द बन गए थे शेन वॉटसन
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2010 में मोहाली में टीम इंडिया के खिलाफ सीरीज का पहला टेस्ट मैच, जब शेन वॉटसन बतौर ओपनर क्रीज पर पहुंचे। पहले वीरेंद्र सहवाग और फिर 37 रन के स्कोर पर पूर्व भारतीय टेस्ट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने उनका कैच छोड़ा। दो जीवनदान मिलने के बाद उन्होंने तीसरा मौका नहीं दिया और पूरे दिन आउट नहीं हुए। उस मैच में उन्होंने 126 रन बनाए थे।
जब टीम इंडिया के लिए सबसे बड़े सिरदर्द बन गए थे शेन वॉटसन
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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2011 में जोहानिसबर्ग में हुआ दूसरा टेस्ट मैच भी शेन वॉटसन की यादगार पारियों में से एक है। वॉटसन के साथ दूसरे छोर पर दिवंगत ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज फिलिप ह्यूज थे। दोनों ने शतकीय साझेदारी के साथ टीम को मजबूती दी। उस मैच में वॉटसन ने 88 रनों का योगदान दिया।
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अब बात करते हैं, गेंदबाजी की। दक्षिण अफ्रीका के ही खिलाफ उसी साल दूसरे मैच में बल्ले से कमाल करने से पूर्व पहले टेस्ट मैच में उन्होंने गेंदबाजी में अपना जौहर दिखाया। 17 रन देकर पांच विकेट झटकने के बाद वह टीम के हीरो साबित हुए। मेजबान अफ्रीकी टीम मात्र 96 रनों पर ढ़ेर हो गई।
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उनकी पांचवीं यादगार पारियों में एक 2008 में नागपुर में भारत के खिलाफ खेला गया चौथा टेस्ट मैच भी है। उस मैच में उन्होंने 42 रन देकर 4 विकेट झटके। भारतीय टीम की ओपनिंग जोड़ी की शतकीय साझेदारी को वॉटसन ने ही तोड़ा था।