वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे पहला उलटफेर आज ही दिन 31 साल पहले लॉर्ड्स में हुआ था।
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भारत के लिए क्यों 'खास' है 25 जून का दिन?
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25 जून, 1983 को वनडे क्रिकेट में पहला बड़ा उलटफेर हुआ था। ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर आज ही के दिन भारत पहली बार क्रिकेट जगत का सिरमौर बना।
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1983 में पहली बार वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारत में क्रिकेट इस कदर लोकप्रिय हुई कि बाकी खेल काफी पीछे छूट गए।
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लॉर्ड्स में आज से 31 साल पहले 25 जून 1983 को क्रिकेट वर्ल्ड कप का तीसरा फाइनल मैच खेला गया। खिताबी जंग में आमने-सामने थे दो बार की चैंपियन वेस्ट इंडीज और भारत।
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1983 में वर्ल्ड कप से पहले भारत का दोनों वर्ल्ड कप में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था और इस बार भी उसे खिताब का प्रवल दावेदार नहीं माना गया था।
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फाइनल मैच में विस्फोटक बल्लेबाज कृष्णमचारी श्रीकांत ने सबसे बड़ी पारी खेली। हालांकि इस मैच में सुनील गावस्कर महज 2 रन ही बना सके।
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पहली बार वर्ल्ड कप का फाइनल खेल रही भारत की पूरी टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 54.4 ओवर में 183 रन बनाकर आउट हो गई।
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60 ओवर में 184 रनों का लक्ष्य विंडीज के लिए आसान माना जा रहा था और लग रहा था कि कैरेबियाई टीम वर्ल्ड कप में खिताबी जीत की हैट्रिक लगाने में कामयाब हो जाएगी। लेकिन मदन लाल ने शुरुआत में 3 विकेट झटककर कैरेबियाई टीम को बैकफुट पर धकेल दिया।
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भारत की ओर से कृष्णमचारी श्रीकांत ने सबसे ज्यादा 38 रन बनाए। जबकि संदीप पाटिल ने 27 रनों का योगदान दिया।
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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान कपिल देव ने जब यह ट्रॉफी उठाई तो दुनियाभर में भारतीय प्रशंसक जीत की जश्न में झूम रहे थे।
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मदन लाल की शुरुआती सफलता के बाद सारा काम कर दिया मोहिंदर अमरनाथ ने। उन्होंने बेहद कसी हुई गेंदबाजी कर 7 ओवर में महज 12 रन देकर 3 विकेट झटके। शानदार गेंदबाजी के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया।
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विवियन रिचर्ड्स और मैल्कम मॉर्शल जैसे धुरंधर खिलाड़ियों से सजी विंडीज टीम कमजोर माने जा रहे भारतीय टीम से पार नहीं पा सकी।
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60 ओवर में 184 रनों का लक्ष्य विंडीज के लिए आसान माना जा रहा था और लग रहा था कि कैरेबियाई टीम वर्ल्ड कप में खिताबी जीत की हैट्रिक लगाने में कामयाब हो जाएगी।
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भारत ने फाइनल में पहुंचने से पहले इंग्लैंड को सेमीफाइनल में हराया था। भारत अभी लक्ष्य से एक रन दूर ही था कि दर्शक उत्साह में मैदान के अंदर चले आए और जश्न मनाने लगे।
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भारतीय बल्लेबाजों ने 1983 के वर्ल्ड कप में जमकर प्रदर्शन किया।
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भारतीय क्रिकेट टीम की इस सफलता के लिए कप्तान कपिल देव को सबसे ज्यादा श्रेय जाता है। उन्होंने टूर्नामेंट में जिंबाब्वे के खिलाफ 175 रनों की रिकॉर्डतोड़ पारी खेली थी।
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इंग्लैंड दौरे पर गए क्रिकेटर स्टुअर्ट बिन्नी के पिता हैं रोजर बिन्नी, जो 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल थे।
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वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे पहला उलटफेर आज ही दिन 31 साल पहले लॉर्ड्स में हुआ था।