भगवान भोलेनाथ की लीलाओं का ध्यान करना और उनकी कथाओं सुनना और पढना बड़ा ही पुण्यदायी होता है। उसमें भी महाशिवरात्रि के अवसर पर इनका ध्यान और दर्शन करने के पुण्य का तो कहना ही क्या तो चलिए शिव की लीला कथाओं को देखें और पुण्य के भागी बनें।
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महाशिवरात्रि: तस्वीरों में देखिए भगवान शिव की लीला
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भगवान शिव अजन्मा और अविनाशी हैं। लेकिन अपनी लीलाओं में यह कई बार बालक रुप में प्रकट हुए हैं लेकिन बाल रुप में इनकी सबसे प्रमुख लीला है देवी अनुसूइया और अत्रि मुनि के घर पुत्र रुप में प्रकट होना। देखिए बाल रुप में भगवान शिव किस तरह शयन का आनंद ले रहे हैं।
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महाशिवरात्रि: तस्वीरों में देखिए भगवान शिव की लीला
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सृष्टि की शुरुआत में ब्रह्मा जी प्रार्थना पर भगवान शिव ने अपने स्वरुप से आदिशक्ति को प्रकट किया। इस रुप में भगवान शिव के शरीर का आधा अंग स्त्री के समान था। इसके बाद से ही मैथुनी सृष्टि का विकास हुआ।
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समुद्रमंथन के समय सागर से निकले हालाहल विष को महादेव ने अपनी अंजुली में उठाकर पी लिया। इससे सृष्टि की रक्षा हुई लेकिन महादेव का कंठ नीला पड़ गया। इसके बाद महादेव नीलकंठ कहलाने लगे। देखिए किस तरह महादेव सागर से निकल विष का पान करके भक्तों और संसार की रक्षा कर रहे हैं।
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भगवान शिव की लीलाओं में ताण्डव नृत्य भी प्रमुख है। पत्नी सती के यज्ञ कुंड में भष्म होने के बाद भगवान शिव प्रलयंकारी नृत्य करने लगे। इस नृत्य को तांण्डव नृत्य कहते हैं। इस नृत्य से संपूर्ण सृष्टि में हाहाकार मच गया। अंत में भगवान विष्णु ने शिव के क्रोध को शांत किया और संसार में 51 शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
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भगवान शिव का एक रुप योगी का भी है। यह अपने अंगों पर भष्म लगाते हैं और सांसारिक मोहमाया से मुक्त होकर मोक्ष की राह दिखाते हैं। देवी सती के आत्मा दाह के बाद जब शिव जी का क्रोध शांत हुआ तब योग में लीन हो गए। इस रुप में शिव जी वैराग्य में भी राग की भावना बनाए रखने का संदेश देते हैं।
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भगवान शिव के योग में लीन हो जाने के बाद देवी सती ने हिमालय की पुत्री पार्वती के रुप में पुनर्जन्म लिया। अपनी तपस्या से शिव जी को प्रसन्न करने के बाद देवी पार्वती ने शिव जी को पति के रुप में पाया। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था इसलिए यह दिन भगवान शिव और उनके भक्तों के लिए बड़ा ही खास है।
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विवाह के बाद तारकासुर के वध के लिए भगवान शिव और पार्वती ने कुमार कार्तिकेय को उत्पन्न किया। इसके बाद शिव परिवार में गणेश का आगमन हुआ। ऐसी मान्यता है कि जो नियमित शिव परिवार की पूजा करता है उनके घर में परिवार में सुख-शांति और आपसी प्रेम बना रहता है।