इस साल नवरात्र का आरंभ 25 सितंबर से होने जा रहा है। कहीं भक्तगण माता के स्वागत के लिए पंडाल सजाने में लगे हैं तो कहीं घर की साफ सफाई में लगे हैं। लेकिन माता का आगमन इस साल ऐसे वाहन पर हो रहा है जो देश और दुनिया के लिए शुभ नहीं माना जा रहा है।
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डोली में आ रही हैं माता, क्या होगा इसका परिणाम?
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इस साल मां दुर्गा डोली में सवार होकर आ रही हैं। मां का वाहन सिंह और जब मां सिंह पर सवार होकर आती हैं तो खुशहाली और समृद्घि लाती हैं लेकिन डोली में आना यह बाताता है कि इस साल महामारी और रोगों में वृद्घि होने वाली है।
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बीते साल मां दुर्गा घाड़े पर सवार होकर आई जिसका परिणाम यह हुआ कि देश में छत्रभंग हुआ, यानी सरकार बदल गई। राजनीति में खूब उठा पटक देखने को मिला। सीमा विवाद और विश्व के कई देशों में हुए युद्घ ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया।
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ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बताती हैं कि, माता का वाहन यूं तो सिंह है लेकिन तिथि के अनुसार हर साल माता का वाहन अलग-अलग होता है। यानी माता सिंह की बजाय दूसरी सवारी पर सवार होकर भी पृथ्वी पर आती हैं। इस संदर्भ में शास्त्रों में कहा गया है कि 'शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता'
इसका अर्थ है सोमवार व रविवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापन होने पर मां दुर्गा हाथी पर आती हैं। शनिवार तथा मंगलवार को कलश स्थापन होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है।
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गुरुवार अथवा शुक्रवार के दिन कलश स्थापन होने पर माता डोली पर चढ़कर आती हैं। बुधवार के दिन कलश स्थापन होने पर माता नाव पर सावर होकर आती हैं।
माता का डोली में आना रोग और राजनीतिक उथल-पुथल के कारण देश दुनिया को प्रभावित करेगा लेकिन महिलाओं के हित में इस वर्ष कुछ बड़े फैसले आ सकते हैं। इस साल महिलाओं के कारण देश का गौरव बढ़ेगा।
इस साल दशहरा 3 अक्तूबर शुक्रवार को है। इसलिए इस साल माता अपने लोक को हाथी पर चढ़कर जाएंगी। हाथी और डोली दोनों ही ऐसी सवारी है जिनसे माता का आना और जाना शुभ नहीं माना जाता है।