उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की सोन नदी के किनारे दो टुकड़ों में बंटे इस पत्थर को प्रेमी जोड़े किसी देवता से कम नहीं मानते हैं। कहते हैं यह पत्थर सतयुग से ही यहां स्थित है और लोरिक एवं मंजरी की प्रेम कथा सुना रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस पत्थर का आशीर्वाद लेने से प्रेम बढ़ता है और संतान की चाहत रखने वालों की मुराद भी पूरी होती है।
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आखिर क्यों खौलते हुए दूध से नहा रहे हैं लोग?
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गोवर्धन पूजा के दिन यहां उत्सव मनाया जाता है। पुजारी पत्थर के नीचे आग जलकर दूध को खौलते हैं। इस खौलते दूध से पुजारी और यजमान स्नान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दूध से स्नान करने पर शरीर जलता नहीं है। दूध से वही लोग जलते हैं जो छली और पापी होते हैं।
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आखिर क्यों खौलते हुए दूध से नहा रहे हैं लोग?
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इस तस्वीर में देखिए पुजारी किस तरह से खौलते दूध में सिर डुबो रहा है। पुजारी के हाथ में डंडा भी है। यह कोई आम डंडा नहीं है। ऐसी मान्यता है कि पुजारी के इस डंडा की मार खाने से चोट नहीं लगती है बल्कि निःसंतान व्यक्तियों को संतान सुख मिल जाता है।
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गोवर्धन पूजा के दिन आयोजित लोरिकायन उत्सव में पूजा का आयोजन। खौलते हुए दूध से स्नान को देखने पहुंचे लोगों के साथ प्रेम की सफलता के लिए मन्नत मांगने वालों की भीड़ भी देखिए।