चोल शासक राजराजा चोल द्वारा निर्मित वृहदेश्वर मंदिर पर भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की कई मूर्तियां बनी हैं। इस मूर्ति में चीर हरण के दृश्य को दिखाया गया है। भगवान श्री कृष्ण कदंब के पेड़ पर बैठे हैं और निवस्त्र गोप कन्याएं श्री कृष्ण से अपने वस्त्र लौटाने की प्रार्थना कर रही हैं। मूर्ति की भाव भंगिमा देखकर ऐसा लगता है जैसे मूर्तियां अभी बोल पड़ेंगी।
गैलरी की सभी तस्वीरें सुंदर नरसिम्हन द्वारा खींची गई है।
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खजुराहो की मूर्तियों को टक्कर देती है इस मंदिर की मूर्तियां
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मंदिर के द्वार पर बने द्वारपाल की इस तस्वीर को गौर से देखिए। द्वारपाल मंदिर में आने वाले श्रद्घालुओं को अपने दाएं हाथ की एक उंगली को ऊपर की ओर उठाकर बता रहा है कि ईश्वर एक है। अपने मन में इसी भाव को लेकर मंदिर में प्रवेश करें और मन के सारे भ्रम को दूर कर लें।
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वृहदेश्वर मंदिर की दीवारों पर और भी कलात्मक एवं भव्य मूर्तियां बनी हुई हैं। इन मूर्तियों को देखने से पहले आइये देखें आसमान को छूते इस भव्य मंदिर को जिसे चोल वंश की शक्ति और समृद्घि का प्रतीक माना जाता है।
खजुराहो की मूर्तियों को टक्कर देती है इस मंदिर की मूर्तियां
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इस तस्वीर को गौर से देखिए यह देवी पार्वती हैं। इस तस्वीर में शिव पत्नी पार्वती को नृत्य की मुद्रा में दिखाया गया है। नृत्य की मुद्रा में भी देवी के हाथों में अस्त्र-शस्त्र दिखाया गया है। यह मूर्ति चोल शासकों की कला में रुचि के साथ शक्ति में आस्था को भी दर्शाता है।
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भगवान विष्णु के अवतारों में से एक अवतार हैं भगवान नृसिंह। इस अवतार में भगवान ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। इस मूर्ति में नृसिंह भगवान को हिरण्यकश्यप का वध करते दिखाया गया है।
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राज राजा चोल के पुत्र राजेन्द्रचोल ने अपने शासन काल में चोल साम्राज्य का काफी विस्तार किया। इसने बंगाल को भी अपने अधीन कर लिया और वहां से गंगा जल लेकर आया। बंगाल विजय को यादगार बनाने के लिए इसने गंगईकोंडा चोलपुरम नाम का शिव मंदिर बनवाया। यह तस्वीर उसी मंदिर की है। मंदिर में मौजूद यह नंदी चूना पत्थर का बना हुआ है। मंदिर में स्थित शिवलिंग दक्षिण भारत का सबसे विशालतम शिवलिंग माना जाता है।
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गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर की इस मूर्ति को गौर से देखिए आपको एक खास बात नजर आएगी। इस मूर्ति का आधा भाग पुरुष का है और आधा स्त्री का है जो भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरुप को दर्शा रहा है।
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चोल शासक राजेन्द्र चोल भगवान शिव का भक्त था। इस मूर्ति में दर्शाया गया है कि भगवान शिव और देवी पार्वती का उन्हें आशीर्वाद मिल रहा है। यह आशीर्वाद पगड़ी के रुप में है जिसे भगवान शिव राजेन्द्र चोल के सिर पर लपेट रहे हैं।
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यह देवी पार्वती की मूर्ति है। इस मूर्ति को गौर से देखिए आपको उस समय की भव्यता और कलात्मकता का एहसास होगा। देवी पार्वती के वस्त्र आभूषण और उनकी छवि ऐसी बनाई गई है कि देखने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता है।