क्या आपको पता था कि परमाणु बम की परिकल्पना सबसे पहले अंग्रेज़ी भाषा के साहित्यकार एचजी वेल्स ने की थी? यही सच है। साल 1914 में एचजी वेल्स की किताब ‘द वर्ल्ड सेट फ़्री’ प्रकाशित हुई। इसमें उन्होंने यूरेनियम से बनने वाले एक ऐसे बम की परिकल्पना की थी जो अनंत काल तक फटता ही रहेगा। कल्पना की गई थी कि इस बम की ताक़त भी असीमित होगी।
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आखिर किसके दिमाग की कल्पना थी एटम बम?
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इतना ही नहीं। वेल्स ने तो यहां तक सोच लिया था कि इसे हवाई जहाज़ से ज़मीन पर गिराया जाएगा। पर वेल्स ने शायद यह नहीं सोचा था कि उनके एक दोस्त विंस्टन चर्चिल और भौतिक शास्त्र के एक वैज्ञानिक लियो स्ज़िलर्ड उनकी परिकल्पना को सच्चाई में बदल देंगे। उस समय यह माना जाता था कि ठोस पदार्थ बहुत ही छोटे छोटे कणों से बना होता है। साइंस म्यूज़ियम के क्यूरेटर एंड्र्यू नैहम का कहना है, “जब यह साफ़ हो गया कि रदरफ़ोर्ड के परमाणु में सघन न्यूक्लीयस है, तो यह समझा गया कि वह एक स्प्रिंग की तरह है।” एचजी वेल्स नई नई खोजों से काफ़ी प्रभावित थे। यह भी देखा गया कि वे आने वाले आविष्कारों के बारे में पहले से ही अनुमान लगा लेते थे, जो कई बार सही साबित होते थे।
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आखिर किसके दिमाग की कल्पना थी एटम बम?
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ब्रिटिश राजनेता चर्चिल ने एचजी वेल्स के नोट्स पढ़े और बहुत ही प्रभावित हुए। वे ख़ुद भी साहित्यकार थे। उन्होंने वेल्स से मुलाक़ात भी की थी। नारंगी के आकार के परमाणु बम के बारे में सबसे पहले सोचने का श्रेय ग्राहम फार्मलो को है। लेकिन यह एचजी वेल्स की किताब से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था। ब्रितानी वैज्ञानिकों ने 1932 में परमाणु को विखंडित करने में कामयाबी हासिल कर ली, हालांकि उस समय भी ज़्यादातर लोग यह मानते थे कि इससे बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा नहीं निकल सकती है। उसी साल हंगरी के वैज्ञानिक लियो स्ज़िलर्ड ने वेल्स की किताब ‘द वर्ल्ड सेट फ़्री’ पढ़ी थी। उन्होंने इस पर यक़ीन किया कि परमाणु के विखंडन से बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा निकल सकती है। उन्होंने इस पर एक लेख भी लिखा, जो वेल्स के विचारों के बहुत ही नज़दीक था।
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स्ज़िलर्ड ने ही सितंबर 1933 में ‘चेन रिएक्शन’ की बात कही थी। उन्होंने लंदन के रसेल स्क्वैयर पर ट्रैफ़िक सिग्नल को देखा तो उनके दिमाग में यह बात आई। उन्होंने लिखा, “मेरे मन में यकायक यह ख्याल आया कि यदि परमाणु को न्यूट्रॉन से तोड़ जाए, जिससे दो न्यूट्रॉन निकले और उसमें से एक न्यूट्रॉन निकल कर फिर ऐसा ही करने लगे, तो मुझे लगता है कि न्यूक्लियर ‘चेन रिएक्शन’ शुरू हो जाएगा।”
ठीक इसी समय नाज़ियों का दबदबा बढ़ रहा था और स्ज़िलर्ड इससे काफ़ी परेशान थे। साल 1945 में चर्चिल ब्रिटेन का संसदीय चुनाव हार गए। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने लॉस एलामोस के वैज्ञानिकों को छोटे बजट पर ही सही, परमाणु बम बनाने को कहा। एचजी वेल्स की मौत 1946 में हो गई। वे उस समय ‘द शेप ऑफ़ थिंग्स टू कम’ फ़िल्म पर काम कर रहे थे। उन्होंने उसमें भी इस बम की बात की थी।