काबुल जहां महिलाओं और लड़कियों को बाइक चलाने की इजाजत नहीं है। स्केटिंग ने इनके जीवन में नया उत्साह भर दिया है।
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तस्वीरें: क्या इन 4 मासूम लड़कियों का मुकाबला कर पाएंगे आप?
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अपनी नई किताब में फुलफर्ड डॉबसन ने लिखा है, "जब आप इन खूबसूरत लड़कियों को मैले कुचैले कपड़ों में स्केट पार्क में बात करते देखते हैं, हंसते खिलखिलाते देखते हैं तो आपको मालूम होता है कि स्केटिंग से इनके जीवन में क्या बदलाव आया है। दुनिया भर में कहीं भी, जब आप लड़कियों को उनकी पसंद की चीजों को करने का मौका देते हैं तो उनका व्यक्तित्व निखरता है। "
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दरअसल इस बदलाव की कहानी 2007 में शुरू हुई, जब अफगान चैरिटी संस्था स्केटिस्तान ने जमीनी स्तर पर बच्चों को स्केटिंग सिखाना शुरू किया था। मौजूदा समय में संस्था 1200 से ज्यादा बच्चों को स्केटिंग सीखा रही है।
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"स्केटबोर्ड चलाना काफी कठिन है और इन लड़कियों की कोमलता को देखते हुए आपको ये एहसास हो जाएगा कि इनमें कितने गजब का साहस है। ये गिरकर उठना, संभलना, दोबारा कोशिश करना, सब जानती हैं। ये अफग़ानिस्तान की युवा महिलाओं की ताकत, उत्साह और पॉजिटिविटी की अदभुत मिसाल है।"
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ये तस्वीर 2014 के टेलर वेसिंग फोटोग्राफिक पोर्ट्रेट प्राइज में दूसरे स्थान पर रही थी। इस फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन लंदन के नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी की ओर से किया गया था।
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डॉबसन ने स्केटिंग करने वाली लड़कियों पर काम जरूर किया है, लेकिन उनकी कई तस्वीरों में एक्शन नहीं दिखता। अब इस तस्वीर के बारे में डॉबसन कहती हैं, "इसने जिस अंदाज में कपड़े पहने हैं, वह आकर्षित करने वाला है। सिर पर स्कार्फ से लेकर उसके चेहरे की आभा तक, सब पर नजरें ठहर जाती हैं।"
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डॉबसन ये भी दावा करती हैं कि इन लड़कियों ने अपनी पसंद से कपड़े पहने और अपने ही स्टाइल से तस्वीरें खिंचवाईं।
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स्केटिस्तान अभावों के साथ जीते परिवारों के बच्चों को स्कूल से जोड़ने का काम भी करता है. इनमें से ज्यादातर बच्चें गली मुहल्ले में काम करने वाले हैं।