16 दिसंबर, 2014 की तारीख खूनी थी या फिर वो आतंकवादी जिन्होंने सैकड़ों मांओं की गोद को सूना कर दिया। उधर स्कूल में खून से सनी उन निर्दोष बच्चों की किताबें थी तो दूसरी तरफ उन सभी मां का दर्द था जो आसुंओं के सैलाब के जरिए बह रहा था। वो चीख रही थीं पर उनकी चीख में आवाज नहीं थी। बस एक ऐसा दर्द था जो शायद कभी भी खत्म न हो सके। जिन बच्चों के लिए उन सभी ने ख्वाब संजोए थे। अब वो सब ख्वाब टूट रहे थे। ख्वाबों को भी टूटते हुए दर्द हो रहा था कि काश हम पूरे हो जाते। उन मासूम बच्चों के लिए ही सही बस हम ख्वाबों को पूरा होना चाहिए था। आज फिर पूरा पाकिस्तान रो रहा है, उन मासूम बच्चों और निर्दोष लोगों की याद में जिन्हें आतंकियों ने मार डाला था।
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यादें: दर्द मिला ऐसा जो मरते दम तक ना जा पाएगा
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उन सभी मांओं की कई ऐसी चीखें थी जो कई देशों की सरहदों को पार करके बहुत दूर तल्क पहुंच चुकी थीं। उन सभी मांओं के दर्द में उस हादसे को देखने और समझने वाली हर मां का दर्द उनके साथ्ा था।
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16 दिसंबर, 2014 का दिन पाकिस्तान की वो सभी मां कभी नहीं भूल पाएंगी जिस दिन उनके निर्दोष बच्चों को आतंकवादियों के नापाक इरादों ने हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया।
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आज पूरे पाकिस्तान में उन मासूम बच्चों को श्रद्धाजांलि दी जा रही है। जिन्हें ठीक एक साल पहले आतंकियों ने मार डाला था। उन स्कूलों की दीवारें, दरवाजें और यहां तक की दरख्त भी उन खौफ के पलों को बयां करते हैं।
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सोचिए जरा जिस जगह पर बच्चों को मौत के घात उतारा गया था वहां पर पहुंचकर इंसान की रूह कांप सी जाती होगी तो उस स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चो का क्या हाल होता होगा।
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पाकिस्तान में पेशावर के स्कूल में आतंकवादियों ने हमलाकर में सैंकड़ो बच्चों को मौत के घाट उतार दिया था। इस हमले की जिम्मेदारी तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।
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तालिबान के प्रवक्ता के मुताबिक ये हमला सेना के अभियान के जवाब में किया गया था।
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पुलिस ने बताया था छह आतंकवादी हमलावरों को मार गिराया गया था और इमारत में लगे विस्फोटों को भी हटा दिया गया।
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16 दिसंबर, 2004 मंगलवार की जाड़े की सुबह पेशावर शहर में स्थित एक आर्मी स्कूल पर हमलावरों ने सुबह ही हमला कर दिया था।
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मरने वाले लोगों की संख्या के बारे में खैबर पख्तूनख्वाह के स्वास्थ्य मंत्री शेहराम तरकाई ने पु्ष्टि की थी।
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अधिकारियों ने बताया कि पांच या छह आतंकवादी सुरक्षाकर्मियों की वर्दी पहनकर स्कूल में दाखिल हुए थे। वहां से गोलीबारी और धमाकों की आवाज सुनाई दी।
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सेना का कहना था कि स्कूल के 500 छात्रों में से ज्यादातर को निकाल लिया गया था। पर भी सैकड़ो बच्चे इस हादसे का शिकार हो गए थे।
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माना जाता है कि उत्तरी वजीरिस्तान और खैर इलाके में हाल में सेना के अभियान में सैकड़ों तालिबान लड़ाके मारे गए थे।
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने हमले की निंदा की थी।
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वहीं भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्विटर पर लिखा था मैं पेशावर में स्कूली हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। ये अमानवीय हमला आतंकवाद का असल चेहरा उजागर करता है।
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जीओ टीवी स्टेशन पर एक छात्र ने बताया कि हमलावर स्कूल के ऑडिटोरियम में आए जहां सेना की टीम बच्चों के लिए फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दे रही थी।
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घायलों को पास के अस्पताल ले जाया जा रहा था। इलाके में हेलिकॉप्टर भी देखा गया था। स्कूल में काम करने वाले मुदासिर अवान ने बताया था हमने छह या सात हमलावरों को देखा।
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जैसे ही गोलाबारी शुरु हुई हम कक्षाओं की तरफ भागे। वे हर कक्षा में जा रहे थे और बच्चों को पीट रहे थे बताया जा रहा है कि मरने वालों में शिक्षक और सैनिक भी शामिल हैं।
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पाकिस्तान के आर्मी पब्लिक स्कूल में आतंकी हमले में मृत 144 लोगों की मौत के गुनहगार चार आतंकियों को पाकिस्तान की सिविल जेल कोहट में फांसी दी जा चुकी है।
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पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने पहली बार किसी आम जनता से आए हुए लोगों को फांसी की सजा दी थी।
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सूत्रों के मुताबिक बताया गया है कि बुधवार को सुबह चार आतंकियों का पाकिस्तान की कोहट जेल में फांसी दे दी गई।
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चार आतंकी आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए आतंकी हमले में दोषी पाए गए थे।
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इस आतंकी हमले में कुल 144 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें ज्यादातर मृत लोग बच्चे थे।
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फांसी देने से पहले मंगलवार को ही आतंकियों के परिवार वालों से उन्हें मिलवा दिया गया था। इन आतंकियों को फांसी तब दी गई।
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पाकिस्तान 16 दिसंबर को इस आतंकी हमले में मृत बच्चों की आत्मा की शांति के लिए पहली वर्षी पर श्रद्धांजालि दे रहा है।
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उन सभी मांओं की कई ऐसी चीखें थी जो कई देशों की सरहदों को पार करके बहुत दूर तल्क पहुंच चुकी थीं।