आतंक का पर्याय बना आईएस बिलकुल एक मल्टीनेशनल कंपनी की तरह काम करता है। फिर चाहे वो भर्ती, प्रमोशन हो या बोनस देने तरीका। तस्वीरों में आईएस की पूरी हकीकत।
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'मल्टीनेशनल कंपनी' की तरह काम कर रहा है शातिर IS
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ब्रांडिंग किसी मल्टीनेशनल कंपनी की तरह आईएस भी अपनी विचारधारा की ब्रांडिंग करता है। इंटरनेट इसका एक बहुत बड़ा माध्यम बना है। ब्रांडिंग के लिए आईएस ने एक खास गुट बनाया है जो आईएस कि विचारधारा, उसके मकसद को चाशनी में डुबो कर फैलाती है। इस ब्रांडिंग का फायदा आईएस को मिला है और अल कायदा के बाद आईएस ही सबसे जाना माना आतंकी संगठन कहलाया जा रहा है।
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भर्ती के विज्ञापन दूसरे आतंकी संगठनों से अलग आईएस बेवसाइट और लीफलेट्स के जरिए बाकायदा विज्ञापन देकर लड़ाकों की भर्ती करता है। अपने इंटरनेट नेटवर्क के जरिए आईएस दुनिया भर में लड़ाकों की फौज के लिए विज्ञापन जारी करता है और उन विज्ञापनों को देखकर आए लोगों के बाकायदा इंटरव्यू लिए जाते हैं जिसके बाद ही एक जिहादी के तौर पर उसकी भर्ती होती है।
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प्रमोशन अपने संगठन और गतिविधियों को लगातार दुनिया के सामने रखने के लिए आईएस लगातार अपना प्रमोशन कर रहा है। फिर चाहे वो दुश्मन सैनिकों को मारने वाले वीडियो हो या बच्चों को बंदूक चलाने और सिर काटने की ट्रेनिंग देने के वीडियो। आईएस हर संभव कोशिश कर रहा है कि वो लगातार सुर्खियों में रहे और दुनिया के जेहन में उसका नाम घूमता रहे।
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नेटकर्किंग आप भी सोचते होंगे कि कौन लोग होंगे जो रोज आईएस के कैंप में जाकर नित नए और मौत के वीडियो अपलोड करते होंगे। आईएस का दुनिया भर में जबरदस्त नेटवर्क फैला है। खास बात ये है कि बहुत पढ़े लिखे और हाई टैक लोग आईएस की विचारधारा को इंटरनेट के माध्यम से सारी दुनिया में फैलाने में लगे हैं।
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ट्रेनिंग आईएस नए रंगरूटों को भर्ती करने के बाद सीधा मोर्चे पर नहीं भेजता। आईएस में एक ट्रेनिंग डिपार्टमेंट है जो नए रंगरूटों को बंदूक चलाना, गुरिल्ला युद्ध और हत्या करने के कई तरीकों का प्रशिक्षण देता है। आपने कई वीडियो देखे होंगे जिनमें बच्चों को बंदूक चलाने और लोगों का गला काटने तक की ट्रेनिंग दी जा रही है। आईएस इसी ट्रेनिंग के बल पर अपने लड़ाकों को निर्भीक और प्रशिक्षित कर रहा है।
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सैलरी आतंकियों को सैलरी देने का मामला भी आईएस को एक मल्टीनेशनल कंपनी साबित करता है। पहली बार सुनने में आया है कि आईएस अपने आतंकियों को सैलरी देता है। पिछले दिनों आई एक खबर के मुताबिक आईएस ने कम फंडिंग के चलते अपने आतंकियों की सैलरी कम कर दी है। यानी किसी भी कंपनी की तरह आईएस भी नफा-नुकसान के पैटर्न पर काम करता है।
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बोनस क्या कोई आतंकी संगठन भी अपने लड़ाकों को बोनस देता होगा। आईएस अच्छे प्रदर्शन से खुश होकर अपने लड़ाकों को यौन गुलाम भेंट करता है। हमला करने के बाद उस इलाके से अपहरण करे लाई गई गैर मुसलिम लड़कियां इन लड़ाकों को पुरस्कार के तौर पर दी जाती हैं जिनका यौन शोषण वो जब चाहे कर सकते हैं। हालांकि यह हद दर्जे का घ्रणित तरीका है लेकिन आईएस इसे जायज मानता है।
फंडिंग किसी उभऱती कंपनी की तरह आईएस को भी अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी करने के लिए फंडिंग की जरूरत होती है। कई देशों में आईएस की विचारधारा से सहानुभूति रखने वाले रईस आईएस को फंडिंग करते हैं। ये फंडिंग लाखों करोड़ों डॉलर में होती है और कुछ देशों में ये फंडिंग हथियारों के रूप में होती है। इस फंडिंग के चलते ही आईएस को नए जमाने के अत्याधुनिक हथियार और तकनीकें मिल पाती हैं।