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लोकप्रियता में एक मंदिर ने ताजमहल को पछाड़ा, तस्वीरें

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यही वह मंदिर है जो दुनियाभर के लोगों के लिए सबसे बड़े आकर्षण के केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है।
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दुनिया के 500 बेहतरीन पर्यटन स्थलों की सूची में लोकप्रियता के मामले में यह मंदिर ताजमहल से आगे निकल गया।


(तस्वीरें साभार- यूनेस्को, सोशल मीडिया)
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'लोनली प्लानेट' नाम की एक संस्था ने पूरी दुनियभर के लोगों से उनके बेहतरीन 500 आकर्षक स्थलों के बारे में पूछा था जिसमें इस मंदिर को लोगों ने अपनी पहली पसंद बताया।

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संस्था ने लोगों के सामने कुल 1000 स्थलों के नाम सुझाए थे जिनमें अंगकोर वाट एकमात्र ऐतिहासिक मंदिर था। इस सूची में ताजमहल को भी शामिल किया गया था।
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विश्व विरासत में शामिल अंगकोर वाट मंदिर-समूह को अंगकोर के राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने बारहवीं सदी में बनवाया था। यह पहले हिंदू प्रभुत्व वाला देश था। चौदहवीं सदी में बौद्ध धर्म का प्रभाव बढ़ने पर इसे बौद्ध स्वरूप दे दिया।
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कंबोडिया में स्थित यह मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। इस में विष्णु जी की मूर्ति विराजमान है।
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आपको लारा क्रॉफ्ट की फिल्म 'टॉम्ब राइडर' तो जरूर या होगी। उस फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग इसी मंदिर के आस-पास हुई थी।

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अंगकोर वाट एक मंदिरों का समूह है जिसमें अलग-अलग देवी देवताओं के मूर्तियां बनाई गई हैं। उनमें से एक है 'द बयॉन टेम्पल' जिसमें कुल 37 खंभे हैं और उस पर 216 चेहरे बने हुए हैं।

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सदियों से गुमनामी के अंधेरे में खोए रहे इस मंदिर को एक फ्रांसिसी पुरातत्वविद ने खोज निकाला। आज यह मंदिर जिस रूप में है, उसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का बहुत योगदान है। सन् 1986 से 93 तक एएसआई ने यहाँ संरक्षण का काम किया था।

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सीताहरण, हनुमान का अशोक वाटिका में प्रवेश, अंगद प्रसंग, राम-रावण युद्ध, महाभारत जैसे अनेक दृश्य बेहद बारीकी से उकेरे गए हैं।

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सियाम रीप क्षेत्र अपने आगोश में सवा तीन सौ से ज्यादा मंदिर समेटे हुए है। बायन का मंदिर एक मात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें धर्म बदलने पर मूर्तियों में बहुत तोड़-फोड़ हुई।

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इस मंदिर की खूबसूरती के लोग इतने दीवाने हैं कि हर साल लगभग 10 लाख लोग इसे देखने के लिए अंगकोर पहुंचते हैं।

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इन मंदिरों में भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं तो है ही लेकिन शायद ही कोई ऐसी कोई ऐसा मंदिर होगा जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश में से किसी की प्रतिमा न हो। अंगकोर वाट की यही बात तो निराली है।

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इस मंदिर की खुबसुरती को केवल तस्वीरों बयां नहीं किया जा सकता। अगर इनको जीना है तो आपको जाना पड़ेगा अंगकोर वाट, जहां इस खूबसूरत मंदिर की प्रतिमाएं आपका इंतजार कर रही हैं।

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ये मंदिर जंगलों से घिरे हुए हैं। ये इतने पुराने हैं कि इनकी दीवारों पर पेड़ के तने फैले हुए हैं जो इनकी प्राचीनता की दास्तां सुनाते हैं।

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ऐसे ही एक मंदिर में पेड़ के जड़ों के भीतर से प्रवेश करता हुआ यह बौद्ध भिक्षु। यह आस्था का प्रतीक ही है जो आज भी लोग पूजा करने के लिए इस मंदिर में जाते हैं। यह परंपरा कई सौ सालों से चली आ रही है।

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यह मन्दिर मेरु पर्वत का भी प्रतीक है। इसकी दीवारों पर भारतीय धर्म ग्रंथों के प्रसंगों का चित्रण है। इन प्रसंगों में अप्सराएं बहुत सुंदर चित्रित की गई हैं, असुरों और देवताओं के बीच अमृत मन्थन का दृश्य भी दिखाया गया है।
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ख्मेर शास्त्रीय शैली से प्रभावित स्थापत्य वाले इस मंदिर का निर्माण कार्य सूर्यवर्मन द्वितीय ने प्रारम्भ किया परन्तु वे इसे पूर्ण नहीं कर सके। मंदिर का कार्य उनके भानजे एवं उत्तराधिकारी धरणीन्द्रवर्मन के शासनकाल में सम्पूर्ण हुआ। मिश्र एवं मेक्सिको के स्टेप पिरामिडों की तरह यह सीढ़ी पर उठता गया है।
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