बातचीत के लिए क्या आपने कभी सीटियों की भाषा इस्तेमाल की है? अगर नहीं, तो अब इसे सीख लीजिए, क्योंकि यह आपके मस्तिष्क के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। तुर्की की मशहूर सीटियों की भाषा पर हुए एक अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि तुर्की में प्रचलित सीटियों की भाषा अनोखी होने के साथ-साथ फायदेमंद भी है।
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जमकर बजाओ सीटी, खुल जाएंगे दिमाग के दरवाजे
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भाषा की खास बात यह है कि इससे मस्तिष्क के दोनों हिस्से सक्रिय रहते हैं। अमूमन भाषाओं की प्रक्रिया मस्तिष्क के बाएं हिस्से से संचालित होती हैं, चाहे फिर आप बोल रहे हों, लिख रहे हों या हस्ताक्षर कर रहे हों।
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लेकिन, सीटियों की भाषा के संबंध में मस्तिष्क के दोनों हिस्सों का सक्रिय होना किसी अपवाद जैसा है। जर्मनी की रूहर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता गंटरकन के मुताबिक ‘हम बेहद भाग्यशाली हैं, जो ऐसी भाषा आज भी जिंदा है।’
सीटियों की भाषा पुराने समय में काफी प्रचलित थी तथा बातचीत का जरिया हुआ करती थी। किसी को 50-90 मीटर की दूरी से बुलाने के लिए आज भी तुर्की के कुछ ग्रामीण इलाकों में सीटियों की यह भाषा इस्तेमाल होती है।