दिल्ली की रहने वाली मनीषा पेशे से एयर होस्ट्रेस रही हैं। लेकिन फैशन का जुनून उन्हें मजबूर करता रहा और आखिरी में नौकरी छोड़कर रैम्प शो के लिए उतर आईं। मनीषा को सबकी तरह ही स्टेज से डर लगता था लेकिन स्कूल से ही सांस्कृतिक कार्यक्रमो में भाग लेती थी। इसके बाद तो मनीषा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मनीषा इण्डिया टुडे के कवर पेज पर आ चुकी हैं। इसके अलावा यूटीवी बिंदास के प्रमोशनल एड में भी दिखीं।
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MNIP 2015: किसी को नहीं मिला घर का साथ, तो किसी ने रैम्प वॉक के लिए बोला झूठ
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मिस नार्थ इण्डिया की प्रतिभागी शगुफ्ता को अपने मन का करियर चुनने से पहले घर की तरफ से परेशानियों का सामना करना पड़ा। शगुफ्ता का कहना है कि मुस्लिम परिवेश होने के कारण कठिनाईयों और भी थीं। लेकिन हार नहीं मानी और घरवालों को समझाया और आखिर में बात बन गई। कॉलेज से शुरु किया पहला रैम्प वॉक और आज शगुफ्ता पहुंच गई हैं मिस नार्थ इण्डिया के फाइनल में।
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देहरादून से वास्ता रखती हैं हमारी ये प्रतिभागी। जयंती अंग्रेजी में एमए कर रही हैं। इसके अलावा पांच साल से थियेटर कर रही हैं। जयंती के शहर में उनके उम्र की लड़कियों की शादी कर दी जाती। लेकिन उनका परिवार उनका बहुत साथ देता रहा। जयंती अपनी इस कामयाबी से खुश हैं। यहां तक की उनके गांव को उनपर बहुत नाज है। उनके गांव में जो भी फेसबुक पर है सभी ने उनकी इस उपलब्धि को शेयर किया है।
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प्रिंटी ने 12वीं पास करते ही ऐयरहोस्ट्रेस की नौकरी कर ली थी। इस क्षेत्र में जाने के लिए मां ने ही प्रोत्साहित किया था। प्रिंटी की मां ने ही अखबार में एड देखकर जाने को कहा था। प्रिंटी मोदीनगर की अकेली एयरहोस्ट्रेस हैं। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा कि वो टॉप 12 तक पहुंच चुकी हैं।
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चड़ीगढ़ की ऊर्जा पिछले पांच महीने से ही मॉडलिंग कर रही हैं। लुधियाना का एक ब्युटी पेजेंट भी जीता है। परिवार वाले पहले तो तैयार नहीं थे बाद में घरवालों को मनाने के लिए एक अनोखा कदम उठाया और फैशन वीक में लेकर गई और बताया कि वो भी कुछ ऐसा ही करेगीं। इसके बाद परिवार उनके इस फैसले पर राजी हुए और उन्हें बढ़ावा दिया।
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मिस नार्थ इण्डिया की प्रतिभागी शिखा के लिए ये किसी सपने से कम नहीं था। शिखा का बचपन का सपना रहा है कि वो फैशन इण्डस्ट्री में जाएं और एक बैहतरीन मॉडल बनें और अपने इस सपने कि तरफ वो एक एक कदम आगे बढ़ा रही हैं। इस पूरे सफर में उनके परिवार को पूरा सहयोग रहा है। इसके अलावा शिखा का कहना है कि उन्होंने फैशन गुरू मार्क रॉबिनसन से भी कैटवॉक सीखा है।
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गाजियाबाद की नूपुर के लिए ये एक अनोखे सफर जैसा है। उन्होनें इससे पहले कभी भी इसतरह से रैम्पवॉक नहीं किया। नूपुर पेशे से मैनेजर हैं और सात साल से नौकरी कर रही हैं। नूपुर को लोगों की मदद करना अच्छा लगता है।
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फैशन इंडस्ट्री अनुकृति को हमेशा से ही लुभाती थी। अनुकृति दिल्ली की हैं। इनको परिवार का साथ उसतरह से नहीं मिला। पर मां के सपोर्ट से अनुकृति आगे आईं। ये प्रतिभागी इंजीनियरिंग की स्टूडेंट हैं। हमेशा से ही अनुकृति के दोस्तों ने उन्हें इस फील्ड में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। हमारी प्रतिभागी इंजीनियरिंग की स्टूडेंट हैं।
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लखनऊ की रहने वाली काव्या का कहना है कि उनका परिवार काफी रुढ़िवादी है। इसके पीछे कारण शायद शहर का माहौल है। लेकिन ये सभी कारण उनके सपने को पूरा करने में उनके आड़े नहीं आई। इसके लिए काव्या ने परिवार को समझाया और तैयार किया। काव्या इसके अलावा लॉ कर रही हैं। काव्या का कहना है कि वो काफी साफ दिल की हैं। वो जो भी हैं बस मुंह पर ही कहती हैं।
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देहरादून से ग्राफिक्स का कोर्स कर रही हैं। परिवार का हमेशा साथ मिला। खास तौर से भाई का। भाई ने ही मिस नार्थ का फार्म भरा था। कृतिका के परिवार का कहना है कि भले ही ताज ना जीते लेकिन कुछ ना कुछ अच्छा सीखकर आएगी उनकी लड़की।
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हंसराज कॉलेज से मेथ्स की पढ़ाई कि हैं समीक्षा ने। काफी क्रयेटिव हैं। पेंटिग, पियानो और डांस सभी का शौक है। सामाजिक कार्यो में भी हाथ बटांती हैं। काफी फिटनेस फ्रीक हैं समीक्षा और अपनी सेहत को लेकर कभी कोई लापरवाही नहीं करती हैं।
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रुद्रपुर से आई अनुकृति खुद को साबित करना चाहती है क्योंकि परिवार वालें चाहते थे कि वो डॉक्टर बने लेकिन इनका तो कुछ और ही सपना था। मिस कुमांउ भी रह चुकी हैं अनुकृति। घर में मां ने सबसे ज्यादा सपोर्ट किया था। खुद अनुकृति का कहना है कि वो काफी अंतर्मुखी हैं। बहुत समय लगता हैं उन्हें लोगों से घुलने मिलने में।