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ना डिग्री, ना डिप्लोमा... फिर भी इनकी कमाई है बेशुमार

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किसी भी नौकरी के लिए जरूरत होती है डिग्री या डिप्लोमा की, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बिना इनके भी बेशुमार कमाई करते हैं।
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ना डिग्री, ना डिप्लोमा... फिर भी इनकी कमाई है बेशुमार

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कीर्तन मंडली/जागरण मंडली: हर शहर और कस्बे में कीर्तन भजन कराती मंडली मिल जाएगी। एकमुश्त फीस और चढ़ावा अलग से।
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हिजड़े भले ही दुनिया के हर समाज में मिलेंगे लेकिन बच्चा होने पर गाने बजाने का रोजगार उन्हें भारत में ही मिला है। हिजड़े आजकल पार्क में बैठे प्रे‌मी प्रेमियों से ब्लैकमेलिंग नेग वसूलने का काम भी करते दिखते हैं।

ना डिग्री, ना डिप्लोमा... फिर भी इनकी कमाई है बेशुमार

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कान साफ करने वाले: कान साफ कराना है तो लोग डॉक्टर नहीं बल्कि सड़क पर बैठे इस आदमी पर ज्यादा यकीन करते हैं।
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ब्लैक में टिकट बेचने वाला: फिल्म देखने गए और सिनेमा हॉल फुल निकला। मायूस ना हों..सिनेमा हॉल के आस पास मंडराते किसी बंदे पर नजर डालिए। वो खुद ब खुद आकर पूछेगा इसी ‌शो टिकट चाहिए क्या?
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बसों में सामान बेचने वाला: गर्मागम पापड़.. खट्टा चूरन...ताजा गोला गरी....लेलो.....बसों में सफर करते रहे हैं तो इस तरह के रोजगार का अनुभव आपको जरूर हुआ होगा। एक चीज लेने पर आठ दस सामान फ्री देने की कला इन्हें बखूबी आती है।
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सीट रोककर बेचने वाले: बस या ट्रेन में च‌ढ़िए तो कुछ लोग यूं ही बैठे मिल जाते हैं। ये यूं ही नहीं बैठते...किसी के लिए सीट रोके रहते हैं। बंदा आने पर इन्हें कुछ पैसा देगा और ये सीट उसके सुपुर्द करके दूसरी बस में जाकर बैठ जाएंगे।

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कबाड़ी: पेपोर रद्दी, लोहा, प्लास्टिक ...कबाड़ी वाला...गली गली घूमने वाले कबाड़ियों को तो आप रोज ही देखते होंगे। आपके घर के फालतू सामान से इनका रोजगार चलता है।

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पिट्ठू: वैष्णो देवी यात्रा के दौरान तीर्थात्रियों के बच्चे और सामान लादे ये पिट्ठू दिखेंगे। जिस चढ़ाई को चढ़ने में जनता की जान निकल जाती है उसी चढ़ाई पर बच्चों को कंधों पर टांगे ये दिन में कई बार पार करते हैं।

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बिल जमा कराने वाले: हालांकि अब जमाना इंटरनेट बिलिंग का है लेकिन गांव और कस्बों में अभी भी कई लोग दूसरे लोगों के बिल जमा कराकर रोजगार कमाते हैं और कमीशन पाते हैं।

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लंगूर बनने बंदर भगाने वाले: यूं तो ये काम लंगूरों का है लेकिन बेरोजगारी के चलते कई लोग लंगूर बन जाते हैं। भारत में कई जगहों पर बंदरों को भगाने के लिए ऐसे मानवीय लंगूर रखे जाते हैं। भारतीय संसद के आस पास भी ऐसे मानवीय लंगूर तैनात किए गए थे।

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घाटों पर भगवान का भेष धरकर भीख मांगने वाले: भगवान के प्रति हमारी आस्था का सबसे ज्यादा फायदा ‌इन्हीं लोगों को मिलता है। धार्मिक स्थलों और ‌नदियों के घाटों पर भगवान का भेस धरे ये लोग श्रद्धालुओं से अच्छी खासी कमाई कर लेते हैं।

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भाड़े के टीचर: गांव देहात में दूरदराज के इलाकों में सरकारी टीचर खुद नहीं जाते बल्कि भाड़े के लोगों को भेजते हैं ताकि हाजिरी लगी रहे। इसके बदले भाड़े के टीचर को रोजगार मिलता है और टीचर सरकारी नौकरी का लुत्फ उठाता है।

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नकल कराने वाले: बोर्ड की परीक्षा दे रहे बच्चों को नकल कराने वालों की यहां कमी नहीं। किसी भी तरीके से ये लोग नकल कराने का ठेका लेते हैं..नकल हुई तो फीस दी जाती है।

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सड़क पर हाथ देखकर भविष्य बताने वाले: पंडित जी सड़क पर ही अपनी दुकान सजाए बैठे हैं। नौकरी, छोकरी, घर मकान और जाने क्या क्या उलझनें सुलझाते हैं। दान दक्षिणा भी जमकर मिलती है। कभी इनका तोता भविष्यवाणी करता है तो कभी गाय।

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गाय लेकर घूमने वाले: पांच पैर वाली या सिर पर आंख वाली गाय माता आपके द्वार पर आ जाए तो बिना कुछ दक्षिणा दिए जाने देंगे क्या। कुछ लोग ऐसी दुकानदारी भी चलाते हैं। अब गाय को क्या मिलता है ये सोचने की बात है।

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शनिदे‍व के नाम पर तेल मांगने वाले: घर और सड़क पर रैड लाइट के दौरान हाथ में तेल का बर्तन लिए शनिदेव के भक्त आपको हर शनिवार मिलते होंगे। इन पर शनिदेव की अच्छी खासी कृपा है और शनि के डर से जनता भी जमकर दान करती है।

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पैसे लेकर रैली में भीड़ लगाने वाले: सरकार किसी की भी बने...लेकिन पैसे लेकर रैली में भीड़ लगाने वालों की हर चुनाव में चांदी रहती है। राजनीति आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच इनकी पहचान नहीं होती लेकिन कमाई अच्छी खासी होती है।
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रूदाली (किसी के मरने पर भाड़े पर रोने वाली औरतें): राजस्थान में रुदाली के पास काम की कमी नहीं। रईस लोगों के घर कोई मर जाए तो भाड़े पर रोने के लिए रुदालियां लाई जाती हैं।
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