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राशन कार्ड ने बना दिया IAS, पढ़िए यूपी के लाल की दिलचस्प कहानी

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यूपीएससी परीक्षा 2014-15 में उत्तर प्रदेश के मेरठ के निशांत जैन हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वालों में अव्वल रहे। वरीयता सूची में उनका 13वां स्थान है। इतनी बड़ी सफलता निशांत ने आखिर कैसे पाई, जानिए उन्हीं की जुबानी।
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राशन कार्ड ने बना दिया IAS, पढ़िए यूपी के लाल की दिलचस्प कहानी

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यूपीएससी परीक्षा 2014-15 का परिणाम जब जारी हुआ, तो उसमें मुझे 13वीं रैंक मिली। यह जानकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इंटरव्यू के समय मुझे विश्वास तो हो गया था कि इस बार मेरा सेलेक्‍शन आईएएस में हो जाएगा, लेकिन उसमें इतनी अच्छी रैंक मिलेगी, यह भरोसा नहीं था। यह मेरा इस परीक्षा के लिए दूसरा प्रयास था।
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जहां तक इसकी प्रेरणा की बात है, तो मैं कहूंगा कि मुझे राशन कार्ड से इसकी प्रेरणा मिली थी। राशन कार्ड को खाद्य रसद अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है। बचपन में अपने परिवार के राशन कार्ड पर अधिकारी शब्द को देखता था, तो वह बहुत आकर्षित करता था। जब दसवीं क्लास में था, तब समझ आया कि अधिकारी बनने के लिए सिविल सेवा की परीक्षा पास करनी होती है।

राशन कार्ड ने बना दिया IAS, पढ़िए यूपी के लाल की दिलचस्प कहानी

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सपना तो मैट्रिक से ही था, लेकिन परिस्थितियों और संघर्ष के चलते सीधे ग्रेजुएशन के बाद इस एग्जाम में बैठने की हिम्मत नहीं हुई। मैं अपने कॅरियर को सेफ जोन में रखकर आईएएस की तैयारी करना चाहता था, इसलिए जब मैं लोकसभा में हिंदी असिस्टेंट के पद पर नौकरी करने लगा, तब मैंने अपने इस सपने के लिए प्रयास शुरू किए।
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शुरुआत में मन में थोड़ा डर भी था कि इस एग्जाम के लिए लोग जी जान से जुड़कर मेहनत करते हैं वहां मैं नौकरी करते हुए आईएएस बनने का सपना देख रहा हूं। लेकिन, जब पढ़ाई शुरू की, तो मेरे लिए यह अपने विषयों का रिविजन ही था, हिंदी साहित्य मेरा विषय था। दूसरा, स्‍कूल में मैंने जिन विषयों को पढ़ा था, मैं उन्हें भूला नहीं था। अगर आपका लक्ष्य स्पष्ट हो, तो उस तक पहुंचने का रास्ता आप ढूंढ ही लेते हैं।
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आईएएस बनना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, जिससे आप डर जाएं। बस खुद को पॉजिटिव रखें और नकारात्मकता फैलाने वालों से दूर रहें। हिंदी माध्यम के छात्र अक्सर अंग्रेजी भाषा से डरते हैं, लेकिन इसे हौव्वा न समझें और इसकी अच्छे से तैयारी करें। अंग्रेजी के प्रति एक बात ध्यान में रखें कि वह हिंदी से ज्यादा आसान होगी। हिंदी वर्णमाला में 52 अक्षर हैं, तो अंग्रेजी में 26 हैं।
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मुझसे इंटरव्यू में पहला प्रश्न भाषा को लेकर ही पूछा गया था कि आप हिंदी में इंटरव्यू देना चाहेंगे या अंग्रेजी में। मैंने कहा, ‘मेरी प्राथमिकता हिंदी होगी, लेकिन यदि आप अंग्रेजी में करना चाहें, तो मुझे ऐतराज नहीं है।’ इसके बाद पैनल ने मुझसे भाषा, अंग्रेजी, समाज, धर्म, भारतीय अर्थव्यवस्‍था, राजनीति आदि विषयों पर 35 मिनट तक चर्चा की। मैं किसी भी प्रश्न पर घबराया नहीं, सहजता से जवाब दिए।
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