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यूपी के पहलवान का ऐसा चला दांव, पढ़कर आप भी करेंगे गर्व

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34वीं राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाले दीपक उज्ज्वल का सपना अब पूरी दुनिया में अपने देश का डंका बजाने का है। गाजियाबाद में बम्हैटा के रहने वाले दीवक उज्जवल को बचपन से ही पहलवानी का शौक था और अपने इसी शौक के जरिए उन्होंने अपनी पहचान बनाई। (रिपोर्ट: कुलदीप सिंह राघव/अमर उजाला, दिल्ली)
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गोल्ड मेडल मिलने से दीपक बेहद खुश हैं लेकिन यह उनका पहला पदक नहीं है। इससे पहले उन्होंने पिछले साल नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था। दीपक को 66 किलो भारवर्ग ग्रीको रोमन स्टाइल में भी गोल्ड मेडल मिला है।
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इसके अलावा दीपक ने 2014 में सीनियर नेशनल में ब्रांज मेडल जीता था। 2014 में ही झारखंड के झुमरी तलैया में हुई जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर जीता था। 2013 में चंडीगढ़ में आयोजित जूनियर नेशनल में ब्रांज मेडल जीता था। 2012 में नालागढ़ हिमाचल प्रदेश में हुई सब-जूनियर नेशनल में सिल्वर और 2011 में कन्याकुमारी में आयोजित सब जूनियर नेशनल में ब्रांज मेडल जीता था।

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दीपक बताते हैं कि 34वीं राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में जीतने पर उन्हें एशियन रेसलिंग में दम दिखाने का मौका मिला है। यह दूसरा मौका है, जब वे एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में पहुंचेंगे। पिछले साल मंगोलिया में हुई एशियन चैंपियनशिप में भी वे शामिल हुए थे।
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फिलहाल दीपक 2016 में होने वाले रिओ ओलंपिक खेलों के लिए सोनीपत में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में हैं। नेशनल कैंप से ही अक्तूबर में वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम चुनी जाएगी। वहीं, वर्ल्ड चैंपियनशिप से रिओ ओलंपिक के लिए भारतीय टीम का चयन होगा।
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दीपक का कहना है कि जीवन में खेल बहुत जरूरी हैं। खेलों ने लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। कैरियर की संभावनाएं खेलों में भी हैं। एक स्वस्‍थ कैरियर चाहते हैं तो खेलों का रुख करने से परहेज न करें। दीपक अपनी सफलता का क्षेय सीनियर पहलवान विजयपाल यादव और बम्हैटा के लोगों को देते हैं। साथ ही परिवार के सहयोग और गुरुओं के आशीर्वाद को भी सफलता के लिए जरूरी मानते हैं।
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