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'पहले कभी नहीं देखी ऐसी हिंसक रात'

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अमेरिका के फर्गुसन शहर में करीब तीन माह पहले 18 वर्षीय अश्वेत युवक माइकल ब्राउन को गोली मारने वाले अधिकारी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाने के ज्यूरी के फैसले के खिलाफ लोगों में तनाव फैल गया और हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए।
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'पहले कभी नहीं देखी ऐसी हिंसक रात'

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सार्वजनिक संपत्ति और निजी वाहनों को भी क्षति पहुंचाई गई। एक अंतरराष्ट्रीय समाचार वेबसाइट को फर्गुसन के पुलिस प्रमुख ने कहा कि उन्होंने ऐसी हिंसक रात पहले कभी नहीं देखी।
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फैसले की जानकारी देते हुए मिसौरी प्रांत के सेंट लुइस काउंटी के सरकारी वकील ने कहा कि ग्रैंड ज्यूरी को माइकल ब्राउन की हत्या में पुलिस अधिकारी डरेल विल्सन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है।

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फैसले की जानकारी मिलते ही सैकड़ों प्रदर्शनकारी उस थाने के सामने एकत्रित हो गए, जहां पर श्वेत पुलिस अधिकारी की तैनाती है।
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न्यूयॉर्क, शिकागो और व्हाइट हाउस के बाहर भी प्रदर्शन की खबरें हैं।
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हालात इतने बिगड़े गए कि राष्ट्रपति बराक ओबामा को प्रदर्शनकारियों से कानून के दायरे में विरोध-प्रदर्शन करने अपील जारी करनी पड़ी और मीडिया से कहना पड़ा कि वे अराजकता फैला रहे लोगों की तस्वीरों को न दिखाएं।
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माइकल ब्राउन पर नौ अगस्त को एक दुकान से जबरन सिगार का पैकेट निकालने का आरोप था। इसके बाद पुलिस अधिकारी डैरेन विल्सन से ब्राउन की झड़प हुई। इसी दौरान विल्सन पर ब्राउन को गोली मारने का आरोप है।

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कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस समय कोई झड़प नहीं हुई थी। ब्राउन को बिना किसी वजह गोली मारी गई थी।

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अश्वेतों के बहुमत के बावजूद फर्गुसन में 53 पुलिस कर्मियों में से केवल तीन अश्वेत हैं। जबकि ग्रैंड ज्यूरी के 12 सदस्यों में से नौ गोरे और तीन अश्वेत हैं।
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मालूम हो कि इस मामले में ज्यूरी के फैसले की तरह 1992 में भी रॉडनी किंग मामले में भी लॉस एजेंल्स पुलिस को एक अश्वेत पर लाठियां बरसाते हुए वीडियो रिकॉर्ड कर लिया गया था लेकिन अधिकतर पुलिसकर्मी बरी कर दिए गए थे। इसके बाद हुए दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी।
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