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दो स्कूल ऐसे, जहां जुमे को छुट्टी, इतवार को पढ़ाई

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मेरठ के रजपुरा ब्लॉक के गांव मेदपुर स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल में उल्टी गंगा बह रही है। इन दोनों स्कूलों में बेसिक शिक्षा परिषद के नियम-कायदे नहीं, बल्कि मनमानी चलती है। (मनु चौधरी, विपुल सैनी/अमर उजाला, मेरठ)
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दो स्कूल ऐसे, जहां जुमे को छुट्टी, इतवार को पढ़ाई

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यहां जुमे (शुक्रवार) को साप्ताहिक अवकाश दिया जाता है तो रविवार को पढ़ाई होती है। यही नहीं, मिश्रित आबादी वाले इस गांव के स्कूलों में न प्रार्थना होती है और न ही राष्ट्रगान गाया जाता है। रजपुरा ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय में 1930 के दशक में उर्दू की पढ़ाई के लिए जाना जाता था। लेकिन, वर्ष-2002 से विद्यालय हिंदी माध्यम हो गया।
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इस समय प्राथमिक विद्यालय में 136 बच्चे हैं। इनमें से 70 फीसदी बच्चे मुस्लिम हैं। विद्यालय की प्रभारी शिक्षिका मीनाक्षी गुप्ता का कहना है कि पुराने समय से यह स्कूल रविवार को खोला जाता है, जबकि शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहता है। अब इसमें हिंदी की भी पढ़ाई होती है। वहीं, पूर्व माध्यमिक विद्यालय मेदपुर में 149 छात्र हैं। यहां भी 70 प्रतिशत छात्र मुस्लिम समुदाय के हैं।

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प्रभारी हेड मास्टर ओमपाल सिंह का कहना है कि जब से वह इस स्कूल में आए हैं, यहां रविवार को ही पढ़ाई होती है, जबकि शुक्रवार को विद्यालय बंद रहता है। उच्च प्राथमिक विद्यालय मेदपुर की बात करें तो 15 अक्तूबर 2003 को विज्ञान के शिक्षक ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र में लिखा था कि यह स्कूल स्थापना के समय से ही (वर्ष-1927) शुक्रवार को बंद रहता है। रविवार को शिक्षण कार्य होता है। यह गांव मुस्लिम बहुल है।
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उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी रविवार के स्थान पर शुक्रवार को अवकाश रखने की अनुमति दें। इस पर तत्कालीन बीएसए ने अनुमति दे दी थी। यह शिक्षक मेदपुर में चर्चाओं में रहा है। इसके बाद मोरना उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी करीब डेढ़ माह पहले आरोप लगने पर उसे विभाग ने अवकाश पर भेज दिया था।
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बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में नियम ताक पर रखते हुए परंपराएं ढोई जा रही हैं। इसके चलते रविवार को भी स्कूल खोले जाते हैं और शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहता है। इससे स्कूल के 30 फीसदी बच्चों के साथ शिक्षकों को भी परेशानी रहती है। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षिका ने बताया कि रविवार को स्कूल खोलने से पूरा शेड्यूल ही बदलना पड़ता है।
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बीएसए इकबाल अहमद का कहना है कि रविवार को स्कूल खुलता है तो यह पुरानी परंपरा होगी। उर्दू माध्यम स्कूलों में ऐसा होता है। मेदपुर विद्यालय के रविवार को खोलने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो जांच कराई जाएगी कि किन हालात में स्कूल रविवार को खोला जा रहा है।
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